इटावा , जून 13 -- उत्तर प्रदेश के इटावा जनपद में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद प्रकाशित विधानसभा मतदाता सूची और पंचायत मतदाता सूची में 1,28,612 मतदाताओं के अंतर का मामला सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी ने इसे गंभीर मुद्दा बताते हुए निर्वाचन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए हैं।
समाजवादी पार्टी के एसआईआर प्रभारी उदयभान सिंह यादव ने आरोप लगाया कि पात्र मतदाताओं को विधानसभा मतदाता सूची से वंचित रखने की साजिश की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के समक्ष रखा गया है। अखिलेश यादव ने पार्टी नेताओं से विस्तृत चर्चा के बाद चुनाव आयोग के अधिकारियों से बात कर मतदाता सूची में कथित विसंगतियों को दूर कराने का भरोसा दिया है।
उदयभान सिंह यादव के अनुसार, पंचायत मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन के बाद जनपद में 9,51,272 मतदाता दर्ज किए गए हैं, जबकि एसआईआर के बाद 10 अप्रैल को प्रकाशित विधानसभा मतदाता सूची में 10,50,636 मतदाता थे।
उन्होंने कहा कि पंचायत मतदाता सूची में केवल ग्रामीण क्षेत्रों के मतदाता शामिल होते हैं, जबकि नगरीय क्षेत्र के मतदाता इसमें शामिल नहीं होते। वर्ष 2023 के नगरीय निकाय चुनाव के दौरान जनपद में 3,12,651 नगरीय मतदाता थे। ऐसे में दो अलग-अलग सूचियों में इतने बड़े अंतर को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
सपा नेता का दावा है कि जनपद के आठ ब्लॉकों में एसआईआर के बाद विधानसभा मतदाता सूची में 8,22,660 मतदाता थे, जबकि पंचायत मतदाता सूची में इन्हीं ब्लॉकों में 9,51,272 मतदाता दर्ज हैं। इस प्रकार 1,28,612 मतदाताओं का अंतर सामने आया है।
उन्होंने विभिन्न ब्लॉकों के आंकड़े भी जारी किए।
सपा नेताओं का कहना है कि जब लंबे समय तक चलने वाले एसआईआर अभियान के दौरान सभी आवश्यक दस्तावेज लेकर मतदाताओं का सत्यापन किया गया था, तब दो माह बाद जारी पंचायत मतदाता सूची में इतने अधिक मतदाताओं का शामिल होना गंभीर सवाल खड़े करता है। पार्टी ने इस मामले की शिकायत निर्वाचन आयोग से करने की बात कही है।
वहीं, जिलाधिकारी शुभ्रांत कुमार शुक्ला ने कहा कि समाजवादी पार्टी की ओर से उठाए गए मुद्दे को गंभीरता से लिया गया है। उन्होंने बताया कि पूरे प्रकरण की जांच के लिए पंचायत विभाग के अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी गई है। रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
यह मामला अब प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है तथा निर्वाचन प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर बहस तेज होने की संभावना है।
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