इटावा , मार्च 24 -- उत्तर प्रदेश में इटावा जिले के संरक्षित वन क्षेत्र में स्थित एक मजार के मामले में वन विभाग के प्राधिकृत अधिकारी की अदालत ने संबंधित पक्षकारों को 28 मार्च तक भूमि स्वामित्व से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।

मामला मोहम्मद गौरी के कथित सेनापति शमसुद्दीन से जुड़ी बताई जा रही मजार की वैधानिक स्थिति से संबंधित है। इस प्रकरण में ध्वस्तीकरण का वाद वन विभाग न्यायालय में विचाराधीन है और पिछले लगभग तीन माह से इसकी सुनवाई चल रही थी।

प्राधिकृत अधिकारी ने पक्षकारों को एक अंतिम अवसर देते हुए निर्देश दिया है कि वे भूमि संबंधी राजस्व अभिलेख एवं अन्य साक्ष्य शपथपत्र के माध्यम से 28 मार्च तक प्रस्तुत करें। न्यायालय के अनुसार, संबंधित पक्षों को साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए पर्याप्त समय दिया जा चुका है।

वन विभाग का दावा है कि संबंधित भूमि संरक्षित वन क्षेत्र में आती है। विभाग की ओर से वर्ष 1916, 1936 और 1946 के गजट अभिलेख प्रस्तुत किए गए हैं, जिनमें इस भूमि को संरक्षित वन के रूप में दर्ज बताया गया है तथा इनमें किसी मजार का उल्लेख नहीं है।

प्रतिवादी पक्ष की ओर से अब तक भूमि स्वामित्व के ठोस राजस्व अभिलेख प्रस्तुत नहीं किए गए हैं। एक पक्ष द्वारा उर्दू में लिखित एक दस्तावेज प्रस्तुत किया गया, हालांकि उससे संबंधित विस्तृत प्रमाण उपलब्ध नहीं कराए जा सके। हालिया सुनवाई में एक पक्ष अनुपस्थित रहा, जबकि दूसरे पक्ष ने नए अधिवक्ताओं के माध्यम से अभिलेखों के अवलोकन के लिए समय मांगा, जिस पर न्यायालय ने सीमित समय प्रदान किया। मामले में निर्धारित तिथि तक दस्तावेज प्रस्तुत किए जाने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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