इटावा , सितंबर 21 -- उत्तर प्रदेश के इटावा में यमुना नदी के किनारे बीहड़ों में स्थित पिलुआ महावीर मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। मंदिर में स्थापित लेटी हुई हनुमान प्रतिमा को लेकर स्थानीय श्रद्धालुओं में मान्यता है कि बजरंगबली स्वयं भक्तों द्वारा चढ़ाया गया प्रसाद ग्रहण करते हैं। प्रतिमा से जुड़ी इस मान्यता के कारण देश के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं।

मंदिर के पीठाधीश्वर हरभजन दास के अनुसार पिलुआ हनुमान मंदिर में स्थापित प्रतिमा ऐसी है, जिसके मुख में लड्डू, दूध, दही और पानी समेत जो भी प्रसाद चढ़ाया जाता है, वह दिखाई नहीं देता। उन्होंने दावा किया कि प्रतिमा से जुड़े इस रहस्य का पता लगाने के लिए कई विशेषज्ञ मंदिर आ चुके हैं। यमुना नदी के किनारे भी यह पता लगाने का प्रयास किया गया कि कहीं प्रसाद के निकलने का कोई स्रोत नदी में तो नहीं खुलता, लेकिन ऐसा कोई स्रोत नहीं मिला।

मंदिर से जुड़ी मान्यताओं के अनुसार प्रतिमा दक्षिण दिशा की ओर मुख किए हुए लेटी अवस्था में है। श्रद्धालुओं का दावा है कि प्रतिमा के मुख में हमेशा पानी रहता है और प्रसाद चढ़ाने पर पानी में बुलबुले जैसी आवाज सुनाई देती है। कुछ श्रद्धालु प्रतिमा से ''राम-राम'' की ध्वनि सुनाई देने का भी दावा करते हैं। हालांकि इन दावों की कोई स्वतंत्र वैज्ञानिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

हरभजन दास ने बताया कि यह मंदिर कभी प्रतापनेर रियासत का हिस्सा था। उनके अनुसार प्रतापनेर के राजा हुक्म तेज प्रताप सिंह को स्वप्न में हनुमान प्रतिमा के बारे में जानकारी मिली थी। राजा ने प्रतिमा को अपने महल ले जाने का प्रयास किया, लेकिन प्रतिमा नहीं हिली। इसके बाद उसी स्थान पर मंदिर का निर्माण कराया गया। मंदिर की देखरेख उनके परिवार की सात पीढ़ियां करती आ रही हैं।

इतिहासकार एवं इटावा के चौधरी चरण सिंह पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज के प्राचार्य डॉ. शैलेंद्र शर्मा ने कहा कि बीहड़ में स्थित यह हनुमान मंदिर अपने आप में ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व रखता है। उन्होंने कहा कि प्रतिमा के मुख में चढ़ाया जाने वाला दूध, पानी और लड्डू कहां जाता है, यह सवाल आज भी अनसुलझा है।

मंदिर से जुड़ी एक अन्य धार्मिक मान्यता महाभारत काल से जुड़ी है। मान्यता है कि यमुना के किनारे से गुजरते समय भीम का सामना हनुमान से हुआ था और हनुमान ने अपनी पूंछ उनके मार्ग में रख दी थी। भीम पूरी ताकत लगाने के बावजूद पूंछ को हटा नहीं सके। बाद में उन्हें हनुमान के वास्तविक स्वरूप का पता चला और उन्होंने उनसे क्षमा मांगी। मंदिर की परंपरा में इस कथा को पिलुआ महावीर से भी जोड़ा जाता है।

बीहड़ के निर्जन क्षेत्र में टीले पर स्थित होने के बावजूद मंदिर में प्रत्येक मंगलवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। बुढ़वा मंगल के अवसर पर यहां विशेष भीड़ होती है और मंदिर प्रबंधन के अनुसार करीब पांच लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान लगाया जाता है। देश के विभिन्न हिस्सों के अलावा विदेशों में रहने वाले हनुमान भक्त भी ऑनलाइन माध्यम से दर्शन करते हैं।

मंदिर की मान्यताओं के अनुसार श्रद्धालु यहां लड्डू, पेड़े, मिठाई और दूध समेत विभिन्न प्रकार का प्रसाद चढ़ाते हैं। भक्तों का विश्वास है कि सच्चे मन से मांगी गई मनोकामना बजरंगबली पूरी करते हैं। मंदिर से जुड़ी लोक मान्यताओं में यह भी कहा जाता है कि बीहड़ों में सक्रिय रहे डकैत भी इस स्थान पर उत्पात मचाने से बचते थे।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बृजेश कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि बुढ़वा मंगल के आयोजन को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं। यातायात व्यवस्था के लिए भी अतिरिक्त पुलिस बल लगाया गया है। उन्होंने कहा कि यमुना किनारे स्थित यह मंदिर सैकड़ों वर्षों से हनुमान भक्तों की आस्था का केंद्र बना हुआ है।

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