रोम , सितंबर 15 -- इटली में प्रस्तावित नए विधेयक के तहत मौजूदा चुनावी प्रणाली को बदला जाएगा और इसकी जगह एक ऐसी आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली लागू की जाएगी, जिसमें संसद में स्पष्ट बहुमत सुनिश्चित करने के लिए सबसे अधिक वोट पाने वाले गठबंधन को 'बोनस सीटें' दी जाएंगी, बशर्ते वह गठबंधन कम से कम 42 प्रतिशत वोटों का आंकड़ा हासिल करे।

नए बनने वाले कानून के अनुसार अगर कोई भी गठबंधन इस सीमा तक नहीं पहुंच पाता है, या निचले सदन और सीनेट के परिणाम अलग-अलग आते हैं, तो विशुद्ध रूप से आनुपातिक प्रणाली का उपयोग किया जाएगा।

इटली के सीनेट ने प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार के पेश नए चुनाव कानून विधेयक को मंगलवार को मंजूरी दे दी। सीनेट में इस विधेयक के पक्ष में 113 वोट पड़े, जबकि 71 सांसदों ने इसके खिलाफ मतदान किया और दो सांसद अनुपस्थित रहे। सीनेट से पारित होने के बाद अब यह विधेयक अपनी तीसरी संसदीय सुनवाई के लिए निचले सदन (लोअर हाउस) में वापस जाएगा। इटली में अभी 'फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट' और 'आनुपातिक प्रतिनिधित्व' का मिश्रण वाली चुनाव प्रणाली अमल में लायी जाती है।

विपक्ष ने इस बोनस सीट प्रणाली को असंवैधानिक करार दिया है और चुनावी प्रणाली में बदलाव के इस प्रयास पर कड़ा विरोध जताते हुए सरकार पर निशाना साधा है। विपक्ष का आरोप है कि सत्तारूढ़ गठबंधन अगले साल होने वाले आम चुनावों में हार के डर से यह चुनावी कानून बदल रहा है, ताकि अपनी हार की संभावनाओं को कम किया जा सके। मंगलवार को हुए अंतिम मतदान से पहले विपक्षी सांसदों ने "घोटाला कानून को ना" लिखे पोस्टर हाथों में लेकर प्रदर्शन किया।

नए बनने कानून के मुताबिक विधेयक के अन्य प्रावधानों के तहत मतदाताओं को पार्टी सूची के छह उम्मीदवारों में से तीन उम्मीदवारों के लिए वरीयता व्यक्त करने का विकल्प भी मिलेगा, जिसमें उम्मीदवारों के नाम लिंग के आधार पर बारी-बारी से रखे जाएंगे।

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