वाराणसी , जून 16 -- काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के आयुर्विज्ञान संस्थान स्थित ट्रॉमा सेंटर के एनेस्थीसियोलॉजी विभाग की प्रोफेसर डॉ. कविता मीणा को भारत स्थित इज़रायल दूतावास द्वारा आयोजित एमएएसएचएवी पूर्व छात्र सम्मेलन में फेलोशिप के अनुभव साझा किये।

कार्यक्रम में इज़राइल में विभिन्न एमएएसएचएवी फेलोशिप कार्यक्रमों में भाग ले चुके पूर्व प्रतिभागियों ने अपने अनुभवों तथा उनके व्यावसायिक प्रभावों को साझा किया।

विशेष पैनलिस्ट के रुप में आमंत्रित डॉ. मीणा ने वर्ष 2018 में इज़रायल के हाइफ़ा स्थित रैम्बम मेडिकल सेंटर में आयोजित "ट्रॉमा सिस्टम्स एवं मास कैजुअल्टी मैनेजमेंट" फेलोशिप के अनुभव साझा करते हुए कहा कि इस प्रशिक्षण ने ट्रॉमा प्रबंधन के प्रति उनकी सोच को नई दिशा दी। उन्होंने बताया कि इससे उन्हें एकीकृत ट्रॉमा प्रणाली, वैज्ञानिक ट्रायेज व्यवस्था, सिमुलेशन आधारित प्रशिक्षण, बहुविषयक टीमवर्क तथा सतत आपदा तैयारी की संस्कृति को निकट से समझने का अवसर मिला।

डॉ. मीणा ने कहा कि इज़रायल में उन्हें सबसे अधिक प्रभावित वहाँ की अत्याधुनिक तकनीक से अधिक "तत्परता की संस्कृति" ने किया, जहां वरिष्ठ चिकित्सकों से लेकर नर्सिंग स्टाफ और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों तक प्रत्येक व्यक्ति आपातकालीन परिस्थितियों में अपनी भूमिका को भली-भांति समझता है। उन्होंने नर्सिंग नेतृत्व, प्री-हॉस्पिटल सेवाओं, आपातकालीन विभाग, ट्रॉमा टीमों तथा पुनर्वास इकाइयों के बीच उत्कृष्ट समन्वय की सराहना की। उन्होंने बताया कि फेलोशिप से प्राप्त ज्ञान को उन्होंने अपने संस्थान में व्यवहारिक रूप से लागू किया।

उन्होंने इज़रायली ट्रॉमा मॉडल से प्रेरित होकर पुराने ट्रायेज क्षेत्र का पुनर्गठन कर समर्पित ट्रॉमा बे की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई तथा पुनर्जीवन क्षेत्र का विस्तार कराया।

अपने संबोधन में डॉ. मीणा ने कहा कि ट्रॉमा प्रबंधन में प्रभावी सुधार केवल अतिरिक्त संसाधनों से नहीं, बल्कि बेहतर योजना, नियमित प्रशिक्षण, टीमवर्क और उपलब्ध संसाधनों के कुशल उपयोग से भी संभव है। उन्होंने स्वास्थ्यकर्मियों को संदेश दिया कि वे वर्तमान मानव संसाधन को प्रशिक्षित कर आपदा तैयारी की संस्कृति विकसित करें।

एमएएसएचएवी-रैम्बम फेलोशिप से प्राप्त ज्ञान को भारतीय चिकित्सा व्यवस्था में प्रभावी ढंग से लागू करने तथा ट्रॉमा देखभाल के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए कार्यक्रम के दौरान उन्हें सम्मानित भी किया गया। यह कार्यक्रम भारत और इज़राइल के बीच स्वास्थ्य सेवा, आपातकालीन चिकित्सा तथा क्षमता निर्माण के क्षेत्र में निरंतर बढ़ते सहयोग का प्रतीक बना।

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