यरूशलम/तेहरान , जून 21 -- स्विट्जरलैंड में अमेरिका-ईरान वार्ता शुरू होने के बीच इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने रविवार को कहा कि हिजबुल्ला के साथ हाल ही में घोषित युद्धविराम के बावजूद इजरायल दक्षिणी लेबनान में अपनी सैन्य मौजूदगी बनाये रखेगा।
श्री काट्ज ने कहा कि इजरायली सेना (आईडीएफ) 'यलो लाइन' के पास बने उस क्षेत्र के भीतर तैनात रहेगी, जिसे इजरायल ने 'सुरक्षा क्षेत्र' घोषित किया है। सेना वहां से हिजबुल्लाह के ठिकानों के खिलाफ अपने अभियान जारी रखेगी।
श्री काट्ज ने कहा, "हमारी सेना लेबनान में यलो लाइन के पास सुरक्षा क्षेत्र में तैनात हैं और वहां से आतंकवादियों व उनके बुनियादी ढांचे के खिलाफ कार्रवाई कर रहे हैं।"उन्होंने कहा, "कल घोषित किया गया युद्धविराम आईडीएफ को सुरक्षा क्षेत्र के भीतर उन सभी मोर्चों पर बनाये रखता है, जो उत्तरी इजरायल की बस्तियों की रक्षा करते हैं।"उन्होंने यह भी कहा कि इस क्षेत्र में इजरायली सैन्य गतिविधियों पर कोई पाबंदी नहीं है और साफ कर दिया कि इजरायल की वहां से पीछे हटने की कोई योजना नहीं है।
यह टिप्पणियां ऐसे समय में आयी हैं, जब ईरान ने चेतावनी दी है कि लेबनान में इजरायल की लगातार सैन्य कार्रवाई व्यापक अमेरिका-ईरान शांति प्रक्रिया को खतरे में डाल सकती है।
ईरान के राष्ट्रपति कार्यालय के संचार विभाग के उपप्रमुख सैयद मेहदी तबाताबाई ने कहा कि जब तक लेबनान में लड़ाई खत्म नहीं हो जाती, तब तक अमेरिका-ईरान के बीच समझौता आगे नहीं बढ़ सकता।
स्विट्जरलैंड में बातचीत शुरू होने से पहले उन्होंने 'एक्स' पर लिखा, "लेबनान में जायोनी शासन के अपराधों के जारी रहने से यह पूरा समझौता अमान्य हो जायेगा।"ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाकिर गालीबाफ ने कहा कि ईरान-अमेरिकी अधिकारियों के साथ बातचीत के दौरान उन मुद्दों को उठायेगा, जिन्हें वह शुरुआती समझौते का इजरायली उल्लंघन मानता है।
ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, ईरानी प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने लेबनान की स्थिति पर मुख्य रूप से ध्यान केंद्रित करने की योजना बनायी है। ईरानी वार्ता दल के प्रवक्ता ने कहा कि बातचीत दिन भर जारी रहने की उम्मीद है, लेकिन इसके रविवार शाम से आगे बढ़ने की संभावना नहीं है।
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने भी वार्ता के मुख्य मुद्दों में से एक पर बात की। उन्होंने ईरान के इस पुराने रुख को दोहराया कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाना चाहता।
श्री पेजेशकियान ने कहा, "अमेरिका के लिए एकमात्र मुद्दा यह है कि हमारे पास परमाणु बम न हो, यह एक ऐसी बात है, जिसे शहीद नेता (खामेनेई) ने भी बार-बार कहा था कि हम परमाणु बम नहीं चाहते। अमेरिका ने कहा कि इसे लिखो और हस्ताक्षर करो और हमने हस्ताक्षर कर दिये।"इजरायल-हिजबुल्ला के बीच युद्धविराम अब भी बेहद अनिश्चित बना हुआ है, क्योंकि शुक्रवार को दोनों पक्षों के युद्धविराम स्वीकार करने की घोषणा के बावजूद किसी ने भी इसकी पूरी शर्तें सार्वजनिक नहीं की हैं। इसके अलावा, दोनों पक्ष लगातार समझौते के प्रति एक-दूसरे की प्रतिबद्धता पर सवाल उठा रहे हैं।
इजरायल ने लेबनान के कुछ हिस्सों में हवाई हमले जारी रखे हैं, जबकि हिजबुल्लाह का कहना है कि इजरायल की कोई भी सैन्य मौजूदगी आगे के हमलों को सही ठहरा सकती है।
लेबनान का यह संघर्ष अमेरिका-ईरान वार्ता से पूरी तरह जुड़ा हुआ है। ईरानी अधिकारी बार-बार इस बात पर जोर दे रहे हैं कि किसी भी क्षेत्रीय समझौते में लेबनान में स्थायी युद्धविराम शामिल होना चाहिए, जैसा अमेरिका से हस्ताक्षरित सहमति पत्र (एमओयू) की शुरुआती धारा में स्पष्ट किया गया है।
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