यरुशलम , अक्टूबर 29 -- इजरायल की केंद्रीय चुनाव समिति के अध्यक्ष और सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश नोआम सोहलबर्ग ने मंगलवार को हुए चुनाव में विदेशी हस्तक्षेप के 'गंभीर संदेहों' की जांच करने के लिए घरेलू सुरक्षा एजेंसी शिन बेट से कहा है। हिब्रू मीडिया की खबरों में आरोप लगाया गया है कि कतर ने अरब मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए धन मुहैया कराया।

श्री सोहलबर्ग ने बुधवार को शिन बेट प्रमुख डेविड जिनी को लिखे पत्र में कहा कि उन्हें ऐसी जानकारी मिली है, जिससे संकेत मिलता है कि इजरायल के हितों के खिलाफ काम करने वाली विदेशी संस्थाओं ने धन के जरिए अनुचित रूप से चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश की हो सकती है।

उन्होंने लिखा, "मैं इन संदेहों की सत्यता की पुष्टि नहीं कर सकता, लेकिन मेरा मानना है कि विदेशी संस्थाओं से जुड़े होने के कारण इनकी पूरी तरह जांच करना आवश्यक है।"श्री सोहलबर्ग ने श्री जिनी को एजेंसी की शक्तियों का इस्तेमाल कर यह पता लगाने का निर्देश दिया कि आरोपों के समर्थन या खंडन में कोई साक्ष्य मौजूद है या नहीं। उन्होंने एक सप्ताह के भीतर जांच के निष्कर्ष भी मांगे।

चैनल 12 और वाईनेट की खबरों के अनुसार, श्री सोहलबर्ग को यह जानकारी शिन बेट ने ही दी थी। कान न्यूज से एक अज्ञात सुरक्षा अधिकारी ने कहा कि खुफिया जानकारी के आधार पर पिछले दो सप्ताह के भीतर जांच शुरू की गयी थी।

अधिकारी ने कहा, "हम समझते हैं कि कुछ गड़बड़ है और हम पूरी जानकारी जुटाने के लिए गंभीरता से इसकी जांच कर रहे हैं।" उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में और जानकारी सामने आने की उम्मीद है।

सुरक्षा और चुनाव अधिकारियों के हवाले से हिब्रू मीडिया की खबरों में कहा गया है कि जांचकर्ताओं को संदेह है कि कतर ने संभावित रूप से अवैध माध्यमों से अरब संगठनों को बड़ी रकम भेजकर अरब मतदाताओं की मतदान में भागीदारी को प्रभावित करने की कोशिश की।

चैनल 12 के अनुसार, कथित तौर पर धन हस्तांतरित करने के तरीके आतंकवाद के लिए पहले इस्तेमाल किये गये तरीकों से मिलते-जुलते थे। हालांकि, इन आरोपों की सार्वजनिक रूप से पुष्टि नहीं हुई है। खबरों में कहा गया है कि कथित गतिविधि के बाद श्री सोहलबर्ग को जानकारी देने से पहले शिन बेट ने कई दिनों तक इस पर नजर रखी थी।

यह जांच ऐसे समय हो रही है, जब चुनाव के लगभग अंतिम नतीजों के अनुसार प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के गठबंधन को 120 सदस्यीय नेसेट में 53 सीटें मिलने का अनुमान है, जबकि गादी आइजेनकोट के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन को 48 सीटें मिलने की संभावना है। मुख्य रूप से अरब दलों रा'म और ज्वाइंट लिस्ट को संयुक्त रूप से रिकॉर्ड 19 सीटें मिलने का अनुमान है। बहुमत के लिए 61 सीटें आवश्यक हैं।

सरकार गठन में अरब दलों की निर्णायक भूमिका निभाने की संभावना ने राजनीतिक तनाव बढ़ा दिया है।

श्री नेतन्याहू की लिकुड पार्टी और गठबंधन के अन्य नेताओं ने चुनाव में अनियमितताओं के आरोप लगाये हैं। वहीं, विपक्षी नेताओं ने पूरी जांच की मांग करते हुए आगाह किया है कि अपुष्ट संदेहों का इस्तेमाल चुनाव परिणामों को प्रभावित करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।

श्री सोहलबर्ग का अनुरोध मतदान प्रक्रिया में साबित हुई अनियमितताओं के बजाय पर्दे के पीछे संभावित विदेशी हस्तक्षेप से संबंधित प्रतीत होता है।

मतदान के दिन शिन बेट प्रमुख जिनी ने कहा था कि मतदान पर नजर रखी जा रही है और प्रक्रिया उचित तरीके से संचालित हो रही है। इजरायल के पुलिस आयुक्त डैनी लेवी ने गुरुवार को कहा कि चुनाव संबंधी अपराधों की शिकायतों और संदेहों की निष्पक्ष जांच की जायेगी।

श्री लेवी ने कहा, "हम किसी को भी चुनाव की निष्पक्षता और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को नुकसान पहुंचाने की अनुमति नहीं देंगे।" उन्होंने कहा कि पुलिस साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई करेगी और अपराधों के लिए जिम्मेदार लोगों को न्याय के कटघरे में लायेगी।

श्री सोहलबर्ग के पत्र की खबर सामने आने से कुछ समय पहले पुलिस के एक सूत्र ने बड़े पैमाने पर मतदाता धोखाधड़ी के आरोपों को खारिज किया था। सूत्र ने कहा कि पिछले चुनावों की तुलना में इस बार चुनाव की निष्पक्षता से जुड़ी बहुत कम अनियमित घटनाएं सामने आयी।

सूत्र ने कहा, "इन दावों के समर्थन में जांच या खुफिया जानकारी पर आधारित कोई साक्ष्य नहीं है।"नयी जांच पर प्रतिक्रिया देते हुए लिकुड ने 'इजरायल के इस्लामीकरण' की कथित कोशिश को लेकर चेतावनी दी और जायोनी दलों से रा'म या ज्वाइंट लिस्ट के साथ सहयोग नहीं करने का आग्रह किया। पार्टी ने कथित विदेशी हस्तक्षेप को लोकतंत्र पर हमला बताते हुए दावा किया कि इसका उद्देश्य नेसेट को प्रभावित करना और दक्षिणपंथी शासन को कमजोर करना था।

विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी याशर के नेता श्री आइजेनकोट ने हस्तक्षेप के किसी भी विश्वसनीय आरोप की जांच की मांग की। उन्होंने हालांकि यह भी कहा कि जांच का इस्तेमाल नई संसद के शपथ ग्रहण में देरी करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।

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