देहरादून , अगस्त 21 -- उत्तराखंड के देहरादून स्थित ग्राफिक एरा डीम्ड विश्वविद्यालय में शुक्रवार को स्मार्ट सिटी बनाने की रूपरेखा तैयार करने के लिए 18 देश के प्रतिनिधियों का अंतर्राष्ट्रीय कॉन्क्लेव शुरू हुआ। स्मार्ट सिटी की जरूरत, कार्य योजनाओं, सावधानियां और संभावनाओं पर इस कॉन्क्लेव में मंथन किया जा रहा है।
सत्र को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि, भारत में इक्वाडोर दूतावास के उप प्रमुख हेनरी लारेआ ने कहा कि स्मार्ट शहरों के विकास के लिए दुनिया के अलग-अलग देशों के अनुभवों से सीखना जरूरी है लेकिन हर शहर को अपनी जरूरतों के अनुसार समाधान विकसित करने होंगे। उन्होंने इक्वाडोर के क्विटो में मेट्रो और एकीकृत सार्वजनिक परिवहन, ग्वायाकिल में शहरी विकास एवं डिजिटल बदलाव तथा कुएनका में साइकिल और इलेक्ट्रिक परिवहन के प्रयासों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि शहरों के बीच अंतर्राष्ट्रीय सहयोग से सफल प्रयोगों को स्थानीय जरूरतों के अनुसार अपनाया जा सकता है।
कुलपति डॉ. नरपिन्दर सिंह ने कहा कि भविष्य के शहर केवल तकनीक से नहीं, बल्कि सुरक्षित, स्वच्छ, टिकाऊ और समावेशी विकास से स्मार्ट बनेंगे। कृत्रिम मेधा (एआई) और डिजिटल तकनीक से यातायात, जल, आपदा प्रबंधन व नागरिक सुविधाएं बेहतर की जा सकती हैं। उत्तराखंड में पर्यावरण के अनुकूल स्मार्ट सिटी मॉडल जरूरी हैं।
मलेशिया के प्रतिनिधि थावा कुमार ने कहा कि स्मार्ट सिटी केवल तकनीक और बुनियादी ढांचे से नहीं बनती, बल्कि लोगों की सोच, भागीदारी और सही तकनीक के उपयोग से विकसित होती है। उन्होंने मलेशिया के अनुभव साझा करते हुए पुनर्चक्रण और पर्यावरण संरक्षण को महत्वपूर्ण बताया।
इस दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में स्मार्ट सिटी डेवलपमेंट, एआई साइबर सुरक्षा, डिजिटल सेवाओं, स्मार्ट परिवहन, स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ शहरी विकास जैसे विषयों पर चर्चा की जाएगी। सम्मेलन में इक्वाडोर, ऑस्ट्रेलिया, मलेशिया, अमेरिका, सिंगापुर, माल्टा, जॉर्जिया, आयरलैंड समेत 18 देश भाग ले रहे हैं।
कार्यक्रम का आयोजन ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ़ मैनेजमेंट ने किया। कार्यक्रम में प्रो वीसी डॉ. संतोष एस सर्राफ, कुलसचिव डॉ नरेश कुमार शर्मा, डॉ. एस. वेंकट, शंभू पासवान, डॉ. शुभम पांडे, शिक्षक-शिक्षकाएं और छात्र-छात्राएं शामिल हुए।
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