चंडीगढ़ , जून 01 -- शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने दावा किया है कि हाल ही में हुए नगर निकाय चुनावों में विजयी 51 निर्दलीय पार्षदों ने शिअद को समर्थन दिया है। इनमें से 31 पार्षदों को सोमवार को औपचारिक रूप से पार्टी में शामिल कर लिया गया, जबकि शेष 20 पार्षदों को जल्द ही पार्टी की सदस्यता दिलाई जाएगी। चंडीगढ़ में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए श्री बादल ने कहा कि 51 निर्दलीय पार्षदों के समर्थन के बाद शिअद के नेतृत्व में जीती गई कुल वार्डों की संख्या बढ़कर 243 हो गई है। उन्होंने बताया कि पार्टी ने अपने चुनाव चिन्ह पर 192 वार्डों में जीत दर्ज की थी।

अकाली दल अध्यक्ष ने दावा किया कि पार्टी ने राज्य की नौ नगर समितियों में पूर्ण बहुमत हासिल किया है। उनके अनुसार मालूका, कोट शमीर, भगता भाईका, भुच्चो, नथाना, लहरा मोहब्बत, संगत, कोट फत्ता और राहों नगर समितियों में शिअद को स्पष्ट बहुमत मिला है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को छह और भाजपा को दो नगर समितियों में बहुमत प्राप्त हुआ।

श्री बादल ने आरोप लगाया कि कई नगर समितियों में शिअद उम्मीदवारों को सबसे अधिक वोट मिलने के बावजूद पराजित घोषित किया गया। उन्होंने जीरकपुर का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां एक शिअद उम्मीदवार को रिटर्निंग अधिकारी के प्रमाण पत्र में सर्वाधिक वोट मिलने के बावजूद आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार के पक्ष में परिणाम घोषित कर दिया गया। उन्होंने मलोट , मुक्तसर और कोट फट्टा में भी ऐसी ही अनियमितताओं का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी (आप) सरकार ने अकाली दल के उम्मीदवारों के नामांकन रद्द करवाने, पुलिस शक्ति के दुरुपयोग और कथित गुंडागर्दी के जरिए चुनाव प्रभावित करने का प्रयास किया, इसके बावजूद शिअद का प्रदर्शन कांग्रेस से बेहतर रहा। श्री बादल ने कहा कि शिअद ने 1,251 सीटों पर चुनाव लड़ा, जबकि कांग्रेस ने 1,550 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे। इसके बावजूद कांग्रेस केवल लगभग 150 सीटें अधिक जीत सकी।

श्री बादल ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से काम कर रही है। उन्होंने कहा कि बिक्रम सिंह मजीठिया के खिलाफ दर्ज किया गया हालिया मामला मुख्यमंत्री भगवंत मान की राजनीतिक बदले की कार्रवाई का हिस्सा है। उन्होंने दावा किया कि एक दिन पहले आप के नेता तलबीर गिल ने कथित तौर पर अपने समर्थक को पुलिस हिरासत से छुड़वा लिया था लेकिन उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई, जबकि श्री मजीठिया को झूठे मामलों में फंसाया जा रहा है।

अकाली दल अध्यक्ष ने कहा कि आप सरकार की कथित दमनकारी नीतियों और विपक्षी नेताओं व कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई से जनता में भारी नाराजगी है और आगामी विधानसभा चुनावों में जनता इसका जवाब देगी।

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