कोरबा , अक्टूबर 07 -- छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में मोटरसाइकिल से गिरने के कारण घुटने में मामूली चोट लगने के बाद कथित झोलाछाप डॉक्टर से उपचार कराने वाले एक युवक की हालत बिगड़ने और बाद में मौत होने का मामला सामने आया है। परिजनों ने बुधवार को मुरली मनोहर उर्फ महाराज पर गलत तरीके से इंजेक्शन लगाने का आरोप लगाया है।
शिकायत के बाद सिविल लाइन थाना पुलिस ने शव का पोस्टमॉर्टम कराकर मामले की जांच शुरू कर दी है। आरोपी घटना के बाद से फरार बताया जा रहा है और उसका मोबाइल बंद है।
पुलिस और परिजनों से आज मिली जानकारी के अनुसार बेंदलकोना गांव निवासी हर प्रसाद सोनवानी (28) रोजी-मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करता था। उसके परिवार में पत्नी और दो बच्चे हैं। रक्षाबंधन 28 अगस्त 2026 के आसपास वह मोटरसाइकिल से कहीं जा रहा था। इसी दौरान अचानक सामने कुत्ता आ जाने से मोटरसाइकिल अनियंत्रित होकर गिर गई और उसके घुटने में मामूली चोट लगी।
चोट का उपचार कराने हर प्रसाद थाना उरगा क्षेत्र के ग्राम तरदा में मुरली मनोहर उर्फ महाराज के पास पहुंचा था। परिजनों का आरोप है कि मुरली मनोहर किराए के मकान में क्लिनिक चलाकर लोगों का इलाज करता था। उपचार के दौरान उसने हर प्रसाद की बाईं कमर में इंजेक्शन लगाया। इंजेक्शन लगने के करीब दो दिन बाद युवक को कमर में तेज दर्द होने लगा। धीरे-धीरे खिंचाव और सूजन बढ़ने के साथ इंजेक्शन वाली जगह पर नीले रंग का निशान पड़ गया।
हालत बिगड़ने पर परिजन दो सितंबर को हर प्रसाद को कोरबा मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले गए। परिजनों के मुताबिक चिकित्सकों ने जांच के बाद इंजेक्शन की वजह से इंफेक्शन होने की बात कही और उपचार शुरू किया। मेडिकल कॉलेज में करीब दो दिन इलाज चलने के बाद मुरली मनोहर को भी युवक की स्थिति की जानकारी मिली।
परिजनों का कहना है कि इसके बाद मुरली मनोहर स्वयं मेडिकल कॉलेज पहुंचा और बेहतर उपचार कराने की बात कहते हुए हर प्रसाद को टीपी नगर स्थित एक निजी अस्पताल में शिफ्ट कराया। निजी अस्पताल में भर्ती किए जाने के बावजूद उसकी हालत में सुधार नहीं हुआ और स्वास्थ्य लगातार बिगड़ता गया।
गंभीर स्थिति को देखते हुए परिजन नौ सितंबर को हर प्रसाद को बेहतर इलाज के लिए रायपुर स्थित एम्स लेकर पहुंचे। परिजनों का आरोप है कि वहां बेड उपलब्ध नहीं होने की बात कहकर उसे भर्ती नहीं किया गया। इसके बाद मरीज को छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल मेकाहारा ले जाया गया, लेकिन परिजनों के अनुसार वहां भी बेड नहीं होने की बात कही गई और इलाज नहीं मिल सका। इसके बाद परिवार हर प्रसाद को वापस कोरबा लेकर आया।
आखिरकार 22 सितंबर को उसे दोबारा मेडिकल कॉलेज अस्पताल कोरबा में भर्ती कराया गया। यहां उपचार जारी रहने के बावजूद उसकी हालत गंभीर बनी रही और पांच अक्टूबर को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
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