श्रीनगर , मार्च 25 -- दिल्ली में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की एक विशेष अदालत ने मंगलवार को अलगाववादी नेता आसिया अंद्राबी को 2018 के कश्मीर अलगाव की साजिश से जुड़े एक मामले में आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई, जबकि उनकी सहयोगियों सोफी फहमीदा और नाहिदा नसरीन को 30 साल की जेल और जुर्माने की सज़ा दी।

प्रतिबंधित संगठन 'दुख्तरान-ए-मिल्लत' से जुड़ी इन तीनों महिलाओं को एनआईए ने जुलाई 2018 में गिरफ्तार किया था। एजेंसी ने उसी साल अप्रैल में अलगाव की साजिश से जुड़ा एक स्वतः संज्ञान मामला दर्ज किया था। ये गिरफ्तारियां 2019 में जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म किए जाने से ठीक पहले की गई थीं।

कश्मीर की एक प्रमुख अलगाववादी नेता 63 वर्षीय अंद्राबी, 'दुख्तरान-ए-मिल्लत' की संस्थापक एवं अध्यक्ष हैं। यह संगठन शुरू में एक सामाजिक-धार्मिक सुधार समूह के तौर पर बना था, लेकिन बाद में इसका जुड़ाव पाकिस्तान-समर्थक और अलगाववादी विचारधारा से हो गया।

केंद्र सरकार ने 2018 में इस संगठन पर प्रतिबंध लगा दिया था और इसे एक आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया था। वर्ष 1963 में श्रीनगर के एक पढ़े-लिखे परिवार में जन्मी अंद्राबी ने गृह विज्ञान में स्नातक किया और बाद में इस्लामिक अध्ययन किया, जिसने कथित तौर पर उनके वैचारिक और राजनीतिक दृष्टिकोण को प्रभावित किया। उन्होंने 1980 के दशक के आखिर में 'दुख्तरान-ए-मिल्लत' की स्थापना की, और 1990 के दशक की शुरुआत में कश्मीर में 'पर्दा' (घूंघट) प्रथा की वकालत करने वाले अपने अभियान के दौरान इस समूह को काफी शोहरत मिली।

सुश्री अंद्राबी ने आशिक हुसैन फकतू से शादी की, जिसे मोहम्मद कासिम के नाम से भी जाना जाता है। वह हिजबुल मुजाहिदीन से जुड़ा एक आतंकवादी कमांडर है, जो कश्मीरी पंडितों के अधिकारों के लिए काम करने वाले कार्यकर्ता हृदय नाथ वांचू की हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सज़ा काट रहा है। उन्हें पहली बार 1993 में गिरफ्तार किया गया था और उसके बाद 2018 में एनआईए द्वारा गिरफ्तार किए जाने से पहले, उन्हें 'सार्वजनिक सुरक्षा कानून ' के तहत कई बार हिरासत में लिया गया। अलगाववादी नेटवर्क पर बड़े पैमाने पर की गई कार्रवाई के तहत, अधिकारियों ने 2019 में सुश्री अंद्राबी के श्रीनगर स्थित घर को ज़ब्त कर लिया था।

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