विशाखापत्तनम , फरवरी 19 -- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आसियान देशों को भारत की हिन्द प्रशांत रणनीति का केंद्र बताते हुए साझा सुरक्षा को क्षेत्रीय समृद्धि की आधारशिला करार दिया है। उन्होंने आसियान साझेदारों का आह्वान किया कि वे आत्मनिर्भरता के प्रयासों से परिपक्व हुए भारत के रक्षा प्रौद्योगिकी तंत्र का लाभ उठाने के लिए आगे आयें।

श्री सिंह ने गुरुवार को यहां नौसेना के मिलन अभ्यास 2026 नौसैनिक अभ्यास के अवसर पर आसियान के नौ सदस्य देशों के मेहमान नौसेना प्रमुखों और नौसैनिक प्रतिनिधिमंडलों के साथ विचार-विमर्श किया। इस बैठक ने भारत की 'एक्ट ईस्ट नीति' तथा 'क्षेत्रों के पार सुरक्षा और विकास के लिए पारस्परिक एवं समग्र उन्नति (महासागर)' की परिकल्पना के प्रति प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।

रक्षा मंत्री ने मिलन 2026 में आसियान नौसेनाओं की महत्वपूर्ण भागीदारी का स्वागत करते हुए कहा कि यह अभ्यास 1995 में चार विदेशी नौसेनाओं के साथ एक विनम्र शुरुआत से विकसित होकर 74 देशों की भागीदारी वाला अब तक का सबसे बड़ा संस्करण बन गया है। उन्होंने हिन्द महासागर नौसैनिक संगोष्ठी - प्रमुखों के सम्मेलन तथा अंतरराष्ट्रीय बेड़ा समीक्षा 2026 के महत्व पर बल दिया जो हिंद-प्रशांत भागीदारों के बीच विश्वास और संचालन परिचय को सुदृढ़ करने में सहायक हैं। चर्चाओं में मिलन 2026 के समुद्री चरण पर भी विचार हुआ, जिसमें पनडुब्बी रोधी युद्ध, हवाई रक्षा और खोज एवं बचाव अभियानों जैसे जटिल समुद्री अभ्यास शामिल हैं।

श्री सिंह ने आसियान को भारत की हिंद-प्रशांत रणनीति का केंद्रीय स्तंभ बताते हुए कहा कि साझा सुरक्षा क्षेत्रीय समृद्धि की आधारशिला है। उन्होंने आसियान साझेदारों को सरकार के 'आत्मनिर्भर भारत' प्रयासों से परिपक्व हुए भारत के रक्षा प्रौद्योगिकी तंत्र से लाभ उठाने के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत तथा विशाखापत्तनम श्रेणी के विध्वंसक पोतों को भारत के 'निर्माता नौसेना' में रूपांतरण के प्रतीक के रूप में रेखांकित किया।

वर्ष 2025 के उत्तरार्ध में आयोजित भारत-आसियान अनौपचारिक बैठक की भावनाओं को दोहराते हुए आसियान प्रतिनिधियों ने क्षेत्र में प्रथम प्रत्युत्तरकर्ता के रूप में भारत की भूमिका की सराहना की। रक्षा मंत्री ने संयुक्त गतिविधियों के विस्तार का प्रस्ताव रखते हुए विशेष रूप से आसियान-भारत रक्षा विचार मंच संवाद तथा युवा नौसैनिक अधिकारियों की सहभागिता से संबंधित पहलों पर बल दिया, ताकि दीर्घकालिक समुद्री स्थिरता सुनिश्चित की जा सके।

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