येरेवान , जून 07 -- आर्मेनिया में संसदीय चुनाव के लिए रविवार को मतदान हो रहा है, जो देश की भविष्य की दिशा तय करने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह मतदान ऐसे समय में हो रहा है जब आर्मेनिया की सरकार यूरोपीय संघ (ईयू) के करीब आ रही है और रूस से दूरी बना रही है, जिसके चलते विपक्ष पर भारी दबाव है।

इस संसदीय चुनाव में 16 राजनीतिक दल और दो गठबंधन समेत कुल 18 राजनीतिक समूह मैदान में हैं, जिनके भाग्य का फैसला 24 लाख से अधिक मतदाताओं के हाथ में है। नियमों के अनुसार, किसी भी अकेले दल को संसद में प्रवेश करने के लिए कम से कम चार प्रतिशत मत हासिल करने होंगे। वहीं दो या तीन दलों के गठबंधन के लिए यह सीमा आठ प्रतिशत और इससे बड़े गठबंधनों के लिए 10 प्रतिशत तय की गई है। इस चुनाव को वैध मानने के लिए न्यूनतम मतदान प्रतिशत की कोई शर्त नहीं है। आर्मेनिया के चुनावी कानूनों में विदेश में मतदान की व्यवस्था न होने के कारण मतदान केंद्र केवल देश के भीतर ही बनाए गए हैं।

इस चुनाव को मुख्य रूप से प्रधानमंत्री निकोल पाशिन्यान की लोकप्रियता की परीक्षा के तौर पर देखा जा रहा है। उनकी सरकार ने जहां यूरोपीय संघ और अमेरिका के साथ करीबी रिश्ते बढ़ाए हैं, वहीं पारंपरिक मित्र रूस के साथ देश के संबंधों में खटास आई है।

यह मतदान ऐसे माहौल में हो रहा है, जब एक दिन पहले ही आर्मेनियाई अधिकारियों ने मुख्य विपक्षी गुट 'स्ट्रॉन्ग आर्मेनिया' के छह संसदीय उम्मीदवारों को हिरासत में ले लिया है। इस गुट का नेतृत्व रूसी-आर्मेनियाई मूल के व्यवसायी सैमवेल कारापेट्यान कर रहे हैं, जो इस समय सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरे हैं।

इससे पहले हाल ही में हुए एक टेलीविजन संवाद के दौरान, वर्ष 2018 की 'वेलवेट रिवोल्यूशन' के बाद सत्ता में आए प्रधानमंत्री पाशिन्यान ने कई बड़े विपक्षी समूहों को चुनाव से बाहर करने की मांग की थी, हालांकि केंद्रीय चुनाव आयोग ने विपक्षी गुट का नाम मतपत्र से हटाने से इनकार कर दिया था।

विपक्षी दलों ने सरकार पर चुनाव से पहले उन पर भारी दबाव बनाने का आरोप लगाया है। रूस के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जाखारोवा ने इन गिरफ्तारियों पर आपत्ति जताते हुए कहा कि इससे चुनाव के लोकतांत्रिक होने पर संदेह पैदा होता है। वहीं रूस के पूर्व राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव ने भी श्री पाशिन्यान पर राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को किनारे करने का आरोप लगाया है।

चुनाव पूर्व अनुमानों के अनुसार, श्री पाशिन्यान की सत्तारूढ़ 'सिविल कॉन्ट्रैक्ट' पार्टी के संसद में सबसे बड़े दल के रूप में उभरने की उम्मीद है, हालांकि उसे पूर्ण बहुमत हासिल करने के लिए कड़ा संघर्ष करना पड़ सकता है। उनके नेतृत्व को चुनौती देने के लिए विपक्ष 17 दलों और राजनीतिक गुटों में बंटा हुआ है।

इस चुनाव को आर्मेनिया की भू-राजनीतिक दिशा तय करने वाले एक जनमत संग्रह के रूप में भी देखा जा रहा है। आलोचकों का तर्क है कि पश्चिमी देशों की तरफ झुकाव के बावजूद आर्मेनिया को कोई ठोस सुरक्षा गारंटी नहीं मिली है, जबकि उसने अपने पारंपरिक सहयोगी और सबसे बड़े आर्थिक साझेदार रूस के साथ संबंधों को नुकसान पहुँचाया है।

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