नयी दिल्ली , जुलाई 02 -- भारत और जापान ने आर्थिक सुरक्षा सहयोग पर एक संयुक्त घोषणा जारी कर अपनी विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी को और मजबूत बनाने तथा महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जतायी है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची के बीच गुरुवार को यहां हुई वार्ता के बाद जारी इस घोषणा में आर्थिक सुरक्षा को द्विपक्षीय संबंधों का एक प्रमुख स्तंभ बताया गया है और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में बढ़ती चुनौतियों, आर्थिक दबाव और गैर-बाजार नीतियों को लेकर चिंता व्यक्त की गयी है।
दोनों देशों ने सेमीकंडक्टर, महत्वपूर्ण खनिज, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी , स्वच्छ ऊर्जा और फार्मास्यूटिकल्स जैसे पाँच प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने का निर्णय लिया है। इसके तहत संयुक्त परियोजनाएँ, निवेश और सार्वजनिक-निजी भागीदारी को बढ़ावा दिया जाएगा।
सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भारत की मिशन योजनाओं के तहत सहयोग बढ़ाया जायेगा , वहीं महत्वपूर्ण खनिजों की खोज और रीसाइक्लिंग, तथा आईसीटी क्षेत्र में 5जी और 6 जी ,आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में साझेदारी को मजबूत किया जायेगा।
स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में दोनों देश हाइड्रोजन और अमोनिया परियोजनाओं पर काम करेंगे, जिसमें ओडिशा में एक प्रमुख परियोजना भी शामिल है। इसके अलावा बैटरी, परमाणु ऊर्जा और कार्बन क्रेडिट व्यवस्था पर भी सहयोग बढ़ाया जायेगा। दवा क्षेत्र में आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने पर ध्यान दिया जायेगा।
घोषणा में संस्थागत तंत्र को और मजबूत करने की बात कही गयी है, जिसमें सरकारी और उद्योग जगत के बीच समन्वय के लिए नये संवाद मंच (ट्रैक 1.5 डायलॉग) की स्थापना का प्रस्ताव शामिल है।
अधिकारियों का कहना है कि यह साझेदारी हिंद प्रशांत क्षेत्र में आर्थिक लचीलापन और रणनीतिक स्वायत्तता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जी 7, जी 20 और क्वाड जैसे बहुपक्षीय मंचों के साथ भी जुड़ी हुई है।
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