छिंदवाड़ा , सितंबर 23 -- मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले की सियालघोघरी स्थित आरसीसीपीएल कोयला खदान में बुधवार शाम करीब चार बजे काम के दौरान दो महिलाओं के बेहोश होने का मामला सामने आया है। खदान प्रबंधन ने दोनों को अस्पताल ले जाने के बजाय खदान परिसर में ही चिकित्सक बुलाकर उपचार कराया। इससे पहले 11 सितंबर को भी दो महिला श्रमिकों के बेहोश होने की घटना सामने आई थी। मजदूर संगठन इंटक ने मामले की शिकायत डीडीएमएस से की है।

राष्ट्रीय कोयला खदान मजदूर संघ (इंटक) के महामंत्री मनोज तिवारी ने डीडीएमएस से चर्चा में कहा कि खदान में दूसरी बार महिलाएं प्रभावित हुई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि खदान में काम की परिस्थितियों में सुधार नहीं किया जा रहा है और खदान के फेस पर अत्यधिक गर्मी रहती है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि डीडीएमएस के निरीक्षण के दौरान उन्हें दूसरे इलाके दिखा दिए जाते हैं।

इससे पहले इंटक ने उमरेठ थाना प्रभारी को ज्ञापन सौंपकर खदान प्रबंधन पर श्रमिकों की सुरक्षा से खिलवाड़ करने का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की थी। संगठन का आरोप है कि सियालघोघरी कोयला खदान में सुरक्षा संबंधी नियमों की अनदेखी करते हुए संचालन किया जा रहा है और उत्पादन को प्राथमिकता देकर श्रमिकों की सुरक्षा को नजरअंदाज किया जा रहा है। संगठन ने बताया कि स्थानीय प्रबंधन को पूर्व में भी असुरक्षित परिस्थितियों में खदान संचालन को लेकर आगाह किया गया था।

इंटक के अनुसार इससे पहले खदान के सेक्शन डब्ल्यू-11 में सीमा इवनाती (32) और ज्योति (24) काम के दौरान बेहोश हो गई थीं। संगठन का कहना है कि उस समय सेक्शन में हवा कम होने और अत्यधिक गर्मी की स्थिति थी। बुधवार को भी दो महिला श्रमिकों के साथ ऐसी ही स्थिति बनने का आरोप लगाया गया है। इंटक ने पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित किए बिना उत्पादन जारी रखने का आरोप लगाते हुए मामले की जांच की मांग की है।

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