अमेठी , अगस्त 21 -- भारत के पहले और एकमात्र केंद्रीय विमानन विश्वविद्यालय राजीव गांधी राष्ट्रीय विमानन विश्वविद्यालय (आरजीएनएयू) ने एयरोस्पेस एवं विमानन शिक्षा के क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत करते हुए पिछले दो वर्षों में छात्र संख्या में तीन गुना से अधिक वृद्धि दर्ज की है। विश्वविद्यालय ने बोइंग, रोल्स-रॉयस, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) और अमेरिका की पर्ड्यू यूनिवर्सिटी समेत 54 राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ शोध और शैक्षणिक साझेदारी की है।
आरजीएनएयू के कुलपति प्रो. भुवनाथ सिंह ने शुक्रवार को विश्वविद्यालय की उपलब्धियों की जानकारी देते हुए बताया कि शिक्षा, शोध, अवसंरचना और उद्योग सहयोग के क्षेत्र में लगातार विस्तार हो रहा है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय 'विकसित भारत-2047' की परिकल्पना के अनुरूप देश के विमानन तंत्र के लिए कुशल मानव संसाधन तैयार करने और शोध एवं नवाचार को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रहा है।
उन्होंने बताया कि शैक्षणिक सत्र 2024-25 में विश्वविद्यालय में 111 विद्यार्थी थे, जिनकी संख्या बढ़कर वर्तमान में 352 हो गयी है। शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए प्रवेश प्रक्रिया अभी जारी है। विश्वविद्यालय में पांच स्कूलों अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी, विमानन विज्ञान, प्रबंधन, मूल विज्ञान एवं मानविकी तथा उन्नत एवं अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी के माध्यम से विभिन्न पाठ्यक्रम संचालित किये जा रहे हैं। इनमें बीटेक, एमटेक, बीएससी, बीबीए, बीएमएस, एमबीए और पीएचडी कार्यक्रम शामिल हैं। इसके अलावा ड्रोन प्रौद्योगिकी और बुनियादी अग्निशमन से जुड़े कौशल आधारित पाठ्यक्रम भी संचालित किये जा रहे हैं। सभी स्कूलों में पीएचडी कार्यक्रम शुरू किये जा चुके हैं।
प्रो. सिंह ने बताया कि विश्वविद्यालय में अब तक 31 शोध प्रकाशन हुए हैं, जिनमें 15 शोध-पत्रिका लेख, 12 सम्मेलन पत्र, तीन पुस्तक अध्याय और एक पेटेंट शामिल है। उन्होंने बताया कि शैक्षणिक वर्ष 2024-25 में शिक्षण स्टाफ की संख्या शून्य थी, जो अब बढ़कर 37 हो गयी है। इनमें 24 नियमित और 13 संविदात्मक शिक्षक शामिल हैं। उद्योग एवं अकादमिक जगत से जुड़े सहायक प्रोफेसरों तथा प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस को इस संख्या में शामिल नहीं किया गया है। गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों की संख्या भी बढ़ी है और वर्तमान में 51 नियमित तथा 10 संविदात्मक कर्मचारी कार्यरत हैं।
विश्वविद्यालय ने अब तक 54 संस्थानों के साथ साझेदारी की है, जिनमें 41 शोध सहयोग और 13 समझौता ज्ञापन शामिल हैं। इनमें रोल्स-रॉयस, बोइंग ग्रुप, एचएएल, जीएमआर एविएशन एकेडमी, इंडियन एमआरओ एसोसिएशन, पर्ड्यू यूनिवर्सिटी (अमेरिका), कोरिया एयरोस्पेस यूनिवर्सिटी (दक्षिण कोरिया) तथा आईआईटी रोपड़, आईआईटी भिलाई, आईआईटी पटना और आईआईटी बीएचयू शामिल हैं।
विश्वविद्यालय के संबद्ध संस्थानों में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय उड़ान अकादमी, फुरसतगंज शामिल है, जहां कमर्शियल पायलट लाइसेंस (सीपीएल) कैडेट्स के लिए विमानन में बीएससी तथा एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियरिंग (एएमई) कैडेट्स के लिए बीएससी पाठ्यक्रम संचालित किये जा रहे हैं। इन पाठ्यक्रमों में कुल 150 सीटें हैं।
इसके अलावा केरल स्थित यूआरबीएक्स कॉलेज ऑफ एविएशन विश्वविद्यालय से संबद्ध है। यहां एविएशन सर्विसेज एवं एयर कार्गो में बीएमएस तथा एविएशन लॉजिस्टिक मैनेजमेंट में एमबीए पाठ्यक्रम संचालित किये जा रहे हैं, जिनकी कुल प्रवेश क्षमता 120 सीट है। तीसरा संबद्ध संस्थान कॉम्बैट आर्मी एविएशन ट्रेनिंग स्कूल, नासिक है, जहां भारतीय सेना के अधिकारियों और कर्मियों के लिए एयरपोर्ट ऑपरेशंस एवं मैनेजमेंट में स्नातकोत्तर डिप्लोमा पाठ्यक्रम संचालित किया जाता है।
विश्वविद्यालय में वर्ष 2025 के दौरान इलेक्ट्रॉनिक्स लैब, इलेक्ट्रिकल लैब, विंड टनल लैब, विमान संरचना प्रयोगशाला और नया पुस्तकालय स्थापित किया गया। नया छात्रावास, संकाय आवास और नया सभागार निर्माणाधीन हैं। इसके अलावा 500 एकड़ के प्रस्तावित हरित परिसर, विमानन उत्कृष्टता केंद्र तथा स्मार्ट ड्रोन एवं यूएवी लैब की स्थापना पर भी काम चल रहा है। एक एयरोस्पेस अकादमिक सुविधा केंद्र प्रस्तावित है।
प्रशासनिक स्तर पर विश्वविद्यालय ने शिकायत निवारण समितियां, एंटी रैगिंग प्रकोष्ठ और शोध बोर्ड सहित विभिन्न संस्थागत व्यवस्थाएं स्थापित की हैं। बौद्धिक संपदा अधिकार एवं शोध नीति, कैरियर विकास, कार्यकारी कार्यक्रम और परामर्श सेवाओं से जुड़े प्रावधानों को भी संस्थागत ढांचे में शामिल किया गया है।
प्रो. सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय की प्रगति आठ रणनीतिक स्तंभों-लचीले शैक्षणिक कार्यक्रम, नवोन्मेषी शोध एवं विकास, गुणवत्तापूर्ण संकाय एवं स्टाफ, सहयोग एवं शोध साझेदारी, जनसंपर्क एवं प्रसार, विश्वस्तरीय अवसंरचना, कुशल प्रशासन और उत्कृष्टता की संहिता पर आधारित है।
उन्होंने कहा कि आरजीएनएयू विमानन एवं वैमानिकी क्षेत्र में वैश्विक उत्कृष्टता केंद्र के रूप में विकसित होने के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है।
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