नागपुर , अप्रैल 25 -- राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख डॉ. मोहन भगवत ने शनिवार को कहा कि उनके स्वयंसेवकों का प्राथमिक उद्देश्य निरंतर आत्म-विकास के माध्यम से व्यक्ति को बेहतर इंसान बनाना है।
श्री भागवत अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) द्वारा पूर्व आरएसएस और एबीवीपी नेता यशवंतराव केलकर की जयंती के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे।
आरएसएस प्रमुख ने इस बात पर जोर दिया कि संगठन असाधारण लक्ष्यों का पीछा नहीं करता, बल्कि अनुशासन, मूल्यों और मजबूत चरित्र को स्थापित करके व्यक्तिगत परिवर्तन पर ध्यान केंद्रित करता है।
उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत स्तर पर सुधार अंततः समाज में प्रतिबिंबित होता है, जिससे व्यापक राष्ट्रीय प्रगति का मार्ग प्रशस्त होता है।
उन्होंने आगे कहा कि आरएसएस के स्वयंसेवक अपने आचरण और व्यवहार को परिष्कृत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं, साथ ही अपने आसपास सकारात्मक प्रभाव पैदा करने के लिए भी काम कर रहे हैं।
उनके अनुसार, संघ का मूल दृष्टिकोण समाज में सार्थक योगदान देने में सक्षम जिम्मेदार व्यक्तियों का पोषण करना है।
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