बेंगलुरु , जून 28 -- बेंगलुरु की एक अदालत ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के खिलाफ कथित तौर पर अपमानजनक टिप्पणी करने के आरोप में दर्ज आपराधिक मानहानि की शिकायत पर कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खरगे और युवा कांग्रेस नेता मोहम्मद हारिस नलपाद को समन जारी करके दोनों नेताओं को 21 जुलाई को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया है।

बेंगलुरु के सिद्धापुरा के आरएसएस कार्यकर्ता ए तेजस ने इस मामले में निजी शिकायत दर्ज करायी थी। अदालत को पहली नजर में यह मामला सही लगा, जिसके बाद यह आदेश आया। अदालत ने शिकायत, सोशल मीडिया पोस्ट, इंटरव्यू के अंश और अन्य सहायक दस्तावेजों को देखने के बाद दोनों नेताओं के खिलाफ आपराधिक मानहानि का मामला दर्ज करने का निर्देश दिया।

शिकायत के अनुसार, श्री खरगे ने 14 अगस्त 2025 को 'एक्स' पर एक पोस्ट के जरिये आरएसएस और उसके सदस्यों के खिलाफ अपमानजनक और आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इस पोस्ट का उद्देश्य संगठन को बदनाम करना और जनता में उसकी छवि को नुकसान पहुंचाना था।

श्री नलपाद पर एक यूट्यूब चैनल को दिए साक्षात्कार के दौरान आरएसएस के खिलाफ अपमानजनक बयान देने का आरोप है। शिकायत में कहा गया है कि उनके बयानों का व्यापक रूप से प्रसार हुआ, जिससे जनता की नजरों में संगठन की प्रतिष्ठा कम हुई।

इस शिकायत में कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री दिनेश गुंडू राव का नाम भी शामिल था। अदालत ने हालांकि इस चरण में उनके खिलाफ कार्यवाही आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया। इसके साथ ही न्यायालय ने श्री खरगे और श्री नलपाद को सुनवाई की अगली तारीख पर पेश होने का निर्देश दिया।

अगर ये दोनों नेता दोषी पाए जाते हैं, तो भारतीय न्याय संहिता के प्रावधानों के तहत इन्हें दो वर्ष तक का जेल, जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है।

मामले पर अब अगली सुनवाई 21 जुलाई को होगी।

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