नयी दिल्ली , अगस्त 12 -- आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव जाधव ने आयुष को जन-जन तक पहुंचाने में हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं के अधिकाधिक उपयोग करने पर जोर देते हुए कहा है कि हिंदी को केवल औपचारिक या संवैधानिक दायित्व न मानकर सुशासन, पारदर्शिता और प्रभावी जनसंपर्क का माध्यम बनाया जाना चाहिए।

श्री जाधव ने बुधवार को कर्तव्य भवन-I में आयुष मंत्रालय की हिंदी सलाहकार समिति की तीसरी बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि हिंदी सलाहकार समिति मंत्रालय में राजभाषा के प्रयोग और प्रचार-प्रसार को मजबूत करने तथा हिंदी को जनकल्याण और जनसंचार का प्रभावी माध्यम बनाने का महत्वपूर्ण मंच है।

उन्होंने कहा कि आयुष भारत की समृद्ध और प्राचीन ज्ञान परंपरा का प्रतिनिधित्व करता है। आयुर्वेद, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध, सोवा-रिग्पा और होम्योपैथी जैसी पद्धतियां देश के साथ-साथ दुनियाभर में लोकप्रिय हो रही हैं। इनके ज्ञान और योजनाओं को भारतीय भाषाओं में उपलब्ध कराने से इनकी पहुंच और बढ़ेगी।

आयुष सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने बताया कि मंत्रालय के आधिकारिक कार्य, पत्राचार, प्रकाशन, वेबसाइट, सोशल मीडिया और जनसंपर्क गतिविधियों में हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रशिक्षण, कार्यशालाओं और प्रोत्साहन योजनाओं के माध्यम से हिंदी के प्रयोग के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

बैठक में आयुष संबंधी ज्ञान, अनुसंधान, वैज्ञानिक साहित्य और जनकल्याणकारी योजनाओं को हिंदी सहित अन्य भारतीय भाषाओं में उपलब्ध कराने पर विचार-विमर्श हुआ। इस अवसर पर मंत्रालय की हिंदी गृह पत्रिका 'अप्रतिम आयुष' का विमोचन भी किया गया जिसमें सांसद राहुल सिंह लोधी और ज्ञानेश्वर पाटिल सहित समिति के अन्य सदस्य और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

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