मोहाली , अगस्त 14 -- पंजाब के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री बलवीर सिंह सिद्धू ने शुक्रवार को प्यूआधी अखाड़ा परंपरा के संस्थापक भगत आसा राम बैदवाण की स्मारक पर पहुंचकर उनकी समाधि पर नतमस्तक होकर श्रद्धासुमन अर्पित किये। इस दौरान उन्होंने स्मारक की प्रबंधक समिति के सदस्योंसे मुलाकात कर क्षेत्र से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया।

श्री सिद्धू ने कहा कि भगत आसा राम बैदवाण ने प्यूआधी लोक संस्कृति, अखाड़ा परंपरा और सामाजिक एकता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनकी स्मृति को संजोना और उनकी विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान भगत आसा राम बैदवाण की स्मृति को समर्पित आधुनिक ऑडिटोरियम के निर्माण के लिए उन्होंने विशेष प्रयास किये थे। चंडीगढ़ के टैगोर थिएटर की तर्ज पर प्रस्तावित इस ऑडिटोरियम के लिए सेक्टर-78 में जमीन और फंड भी मंजूर करवाये गये थे, ताकि प्यूआध की संस्कृति, लोक कलाओं, अखाड़ा परंपरा और सांस्कृतिक गतिविधियों को बड़ा मंच मिल सके।

श्री सिद्धू ने कहा कि यह महज एक इमारत बनाने का मामला नहीं है, बल्कि प्यूआध की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और भगत आसा राम बैदवाण की स्मृति को स्थायी रूप से संरक्षित करने से जुड़ा विषय है।

उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा आम आदमी पार्टी सरकार ने इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट को लंबे समय से लटका रखा है, जिससे क्षेत्र के लोगों की भावनाएं आहत हो रही हैं। उन्होंने सवाल किया कि जब कांग्रेस सरकार के समय प्रोजेक्ट के लिए जमीन और फंड मंजूर किये जा चुके थे तो करीब पौने पांच साल के कार्यकाल में इसका निर्माण शुरू क्यों नहीं कराया गया।

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि पंजाब की मौजूदा 'आप' सरकार ने बड़े-बड़े वादे तो किये, लेकिन पहले से स्वीकृत और जनहित से जुड़े प्रोजेक्टों को जमीन पर उतारने में विफल रही है।

श्री सिद्धू ने क्षेत्रवासियों को भरोसा दिलाया कि पंजाब में कांग्रेस की सरकार बनने पर भगत आसा राम बैदवाण ऑडिटोरियम का प्रोजेक्ट बिना किसी और देरी के दोबारा शुरू करवाया जाएगा और इसके निर्माण को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि प्यूआध की सांस्कृतिक विरासत को उचित सम्मान दिलाने के लिए कांग्रेस पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि भगत आसा राम बैदवाण की स्मृति केवल एक व्यक्ति की स्मृति नहीं, बल्कि पूरे प्यूआध की सांस्कृतिक पहचान और विरासत का हिस्सा है। इस विरासत को संरक्षित करने के लिए हरसंभव प्रयास किया जाएगा।

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