चंडीगढ़ , मार्च 19 -- पूर्व शिक्षा मंत्री और विधायक परगट सिंह ने गुरूवार को कहा कि खुद को पाक-साफ और ईमानदार बताने वाली आम आदमी पार्टी की सरकार के सरपंच और 'नशा मुक्ति समितियों' के सदस्य करोड़ों रुपये की हेरोइन तस्करी में पकड़े जा रहे हैं। इनके तार कथित तौर पर पाकिस्तानी तस्करों से जुड़े हैं, तो सरकार की नीयत पर सवाल उठना लाजमी है।

श्री सिंह ने मांग की कि इस उच्च स्तरीय नशा तस्करी की जांच स्वापक नियंत्रण ब्यूरो (एनसीबी), केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) जैसी केंद्रीय एजेंसी या हाईकोर्ट की देखरेख में होनी चाहिए। उन्होंने कहा, "ऐसी जांच इस बड़े नशा रैकेट में शामिल आम आदमी पार्टी के छोटे-बड़े नेताओं के संरक्षण और संलिप्तता को उजागर करने के लिए जरूरी है। यह भी सामने आना चाहिए कि नशे से कमाया गया पैसा कहाँ निवेश किया जा रहा है? क्या इसका इस्तेमाल पार्टी के चुनावी अभियानों के लिए किया जा रहा है?" उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इतना बड़ा नशा तस्करी रैकेट बिना सरकारी संरक्षण के चल सकता है?श्री सिंह ने कहा कि भगवंत मान सरकार इसके लिए पूरी तरह जिम्मेदार है क्योंकि नशा तस्करों का राजनीतिक गठबंधन विस्तार कर रहा है। सरकार फर्जी अभियान चलाकर लोगों को गुमराह नहीं कर सकती। मुख्यमंत्री को स्पष्ट करना चाहिए कि क्या यही उनका "नशे के खिलाफ युद्ध" है।

उन्होंने हालिया घटनाओं का हवाला देते हुए कहा कि पहले 'आप' सरपंच और नशा मुक्ति समिति के सदस्य परमजीत सिंह से 18 किलो से अधिक हेरोइन जब्त की गई थी। अब मजीठा के गाँव कोट हिरदे राम के एक अन्य 'आप' सरपंच लवप्रीत सिंह से 4.3 किलो से अधिक हेरोइन बरामद हुई है। उन्होंने कहा कि सरपंचों से इतनी बड़ी मात्रा में नशीले पदार्थों की बरामदगी पुलिस व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करती है। इस बड़े तस्करी नेटवर्क को तोड़ने के लिए सभी कड़ियों को जोड़ना जरूरी है, जिससे पता चल सके कि कितने "प्रतिष्ठित" व्यक्ति और 'आप' नेता इस नेटवर्क में शामिल हैं।

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