नयी दिल्ली , जुलाई 31 -- जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उनकी पत्नी पायल अब्दुल्ला के बीच वैवाहिक विवाद सुलझने की जानकारी मिलने के बाद उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को उनके विवाह बंधन को समाप्त कर दिया है।
शीर्ष न्यायालय ने बताया कि लंबे समय से अलग रह रहे दंपति ने अपने वैवाहिक विवाद आपसी सहमति से सुलझा लिये हैं। इसके बाद न्यायालय ने दोनों के विवाह-विच्छेद (तलाक) को मंजूरी दे दी।
श्री अब्दुल्ला की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने शीर्ष न्यायालय में कहा, "दोनों ने आजादी अपना ली है। सब कुछ तय हो गया है। न्यायालय तलाक की मंजूरी दे सकती है। बाकी सभी मामले वापस ले लिये जायेंगे।"न्यायमूर्ति पामिदिघंटम श्री नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा, "यह अच्छी बात है। हम इन्हीं शर्तों के आधार पर इस मामले का निपटारा करेंगे।"शीर्ष न्यायालय ने 30 अगस्त 2024 को जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ल और उनकी अलग रह रही पत्नी पायल अब्दुल्ला को अपने वैवाहिक विवादों के समाधान के प्रयास के तहत उच्चतम न्यायालय मध्यस्थता केंद्र में मध्यस्थता प्रक्रिया से गुजरने का निर्देश दिया था।
न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया (अब सेवानिवृत्त) और न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की पीठ ने श्री अब्दुल्ला और श्रीमती पायल को अपने विवादों के समाधान के लिए उच्चतम न्यायालय मध्यस्थता केंद्र के समक्ष संयुक्त रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया था।
श्रीमती पायल अब्दुल्ला के वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान के सुझाव पर न्यायालय ने दोनों पक्षों के वैवाहिक विवाद को मध्यस्थता के लिए भेजा था।
श्री अब्दुल्ला का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने हालांकि दलील दी थी कि मध्यस्थता का मकसद विवादों का निपटारा करना होना चाहिए, न कि सुलह कराना। उन्होंने कहा था कि श्री अब्दुल्ला और श्रीमती पायल पिछले 15 वर्षों से अलग रह रहे हैं। यह कहते हुए कि मध्यस्थता की शायद ज़रूरत न हो, श्री सिब्बल ने शीर्ष न्यायालय के एक पुराने फैसले का हवाला दिया था, जिसमें विवाह के पूरी तरह टूट जाने को तलाक का आधार माना गया था। बाद में हालांकि वह मध्यस्थता के लिए तैयार हो गये थे।
गौरतलब है कि श्री अब्दुल्ला और श्रीमती पायल अब्दुल्ला का विवाह सितंबर 1994 में हुआ था लेकिन दोनों 2009 से अलग रह रहे हैं। उनके दो बेटे हैं।
दिल्ली की पटियाला हाउस अदालत ने 30 अगस्त 2016 को परिवार न्यायालय ने क्रूरता के आधार पर तलाक मांगने वाली श्री उमर अब्दुल्ला की याचिका खारिज कर दी थी। उन्होंने 2013 में परिवार न्यायालय का रुख किया था।
गत 12 दिसंबर 2023 को दिल्ली उच्च न्यायालय ने परिवार न्यायालय के फैसले को बरकरार रखा और श्री अब्दुल्ला को तलाक देने से इनकार कर दिया। उनकी अपील खारिज करते हुए उच्च न्यायालय ने कहा कि उसे परिवार न्यायालय के फैसले में कोई खामी नहीं मिली। न्यायालय ने यह भी टिप्पणी की कि श्री अब्दुल्ला के पत्नी पर लगाये गये क्रूरता के आरोप अस्पष्ट थे।
उच्च न्यायालय ने यह भी कहा था कि श्री अब्दुल्ला अपनी अलग रह रही पत्नी पायल अब्दुल्ला द्वारा कथित रूप से की गई किसी भी शारीरिक या मानसिक क्रूरता को साबित करने में विफल रहे।
गौरतलब है कि दिल्ली उच्च न्यायालय के 12 दिसंबर 2023 के आदेश से असंतुष्ट होकर उमर अब्दुल्ला ने उच्चतम न्यायालय का रुख किया था, जिस पर न्यायालय ने 15 जुलाई 2024 को पायल अब्दुल्ला को नोटिस जारी किया था।
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