नयी दिल्ली , जुलाई 30 -- विशाखापत्तनम रेलवे स्टेशन आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित होगा। इसके लिए रेलवे ने 299 करोड़ रुपये की परियोजना को मंजूरी प्रदान की है।

रेलवे गुरुवार को बताया कि इस परियोजना मकसद देश के सबसे व्यस्त रेलवे टर्मिनलों में से एक विशाखापत्तनम कोचिंग यार्ड की क्षमता को बढ़ाना, समय की पाबंदी में सुधार करना और यात्रियों के लिए आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराना है। मंज़ूर की गयी परियोजना में इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग (ईआई) के साथ-साथ अतिरिक्त लाइनें और प्लेटफॉर्म का निर्माण शामिल है।

गौरतलब है कि विशाखापत्तनम रेलवे स्टेशन एक प्रमुख कोचिंग टर्मिनल है, जहाँ रोज़ाना औसतन 113 ट्रेनें आती-जाती हैं और लगभग 80,000 यात्री यात्रा करते हैं। यार्ड के मौजूदा लेआउट के कारण यहाँ खत्म होने वाली और गुज़रने वाली ट्रेनों को सरफेस क्रॉसिंग से गुज़रना पड़ता है, जिससे अप्रोच सिग्नल पर ट्रेनें रुकती हैं, प्लेटफॉर्म की उपलब्धता कम हो जाती है और कामकाज में रुकावटें आती हैं।

रेलवे के अनुसार इस यार्ड के पुनर्निर्माण से इन सरफेस क्रॉसिंग का असर कम होगा, ट्रेनों के रुकने का समय घटेगा, प्लेटफॉर्म का बेहतर इस्तेमाल हो सकेगा और ज़्यादा ट्रेनों को संभालने में मदद मिलेगी। इस परियोजना के तहत लूप लाइनों को हटाना और पॉइंट ज़ोन को फिर से व्यवस्थित करना, मौजूदा छह प्लेटफॉर्म को चौड़ा करना,आधुनिक यात्री सुविधाओं से सुसज्जित छह अतिरिक्त प्लेटफॉर्म बनाना और छह अतिरिक्त रेलवे लाइनें बिछाना शामिल है।

इसके अलावा चौड़े किये गये प्लेटफॉर्म पर रैंप, लिफ्ट और एस्केलेटर जैसी यात्री सुविधाएं विकसित करना ताकि आसानी से आवाजाही हो सके और यात्रियों को सुविधा मिले, स्टेशन के पूर्वी हिस्से में नया प्रवेश द्वार बनाना और यात्री आरक्षण प्रणाली (पीआरएस) को दूसरी जगह स्थानांतरित करने का काम शामिल है।

रेलवे ने कहा कि इस स्टेशन के पुनर्निमाण का पूरा हो जाने पर कोचिंग यार्ड में भीड़ कम होगी, प्लेटफॉर्म की उपलब्धता बढ़ेगी और ट्रेनों की आवाजाही आसान होगी, जिससे कामकाज की क्षमता में काफी सुधार होगा। अतिरिक्त बुनियादी ढांचे से विशाखापत्तनम स्टेशन यात्रियों की बढ़ती मांग को पूरा कर सकेगा और साथ ही समय की पाबंदी में सुधार होगा और ट्रेनों के रुकने का समय कम होगा।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित