चंडीगढ़ , अक्टूबर 28 -- आधुनिक जीवनशैली, बढ़ते तनाव और कम उम्र में मधुमेह एवं उच्च रक्तचाप जैसी बीमारियों के कारण युवाओं में स्ट्रोक के मामले बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि कभी मुख्य रूप से बुजुर्गों से जुड़ी मानी जाने वाली यह बीमारी अब 30 वर्ष की उम्र के लोगों को भी प्रभावित कर रही है।
राष्ट्रीय मस्तिष्क अनुसंधान केंद्र (एनबीआरसी), मानेसर की ओर से विश्व स्ट्रोक दिवस की पूर्व संध्या पर आयोजित वेबिनार 'स्ट्रोक-आधुनिक जीवनशैली से जुड़ा विकार' के बाद जारी जानकारी के अनुसार, भारत में हर साल लगभग 15 से 18 लाख लोग स्ट्रोक का शिकार होते हैं। इसकी वार्षिक दर प्रति एक लाख आबादी पर 130 से 170 मामले बताई गई है। स्ट्रोक देश में मृत्यु का दूसरा और दिव्यांगता का तीसरा प्रमुख कारण है।
भारतीय तंत्रिका विज्ञान अकादमी के कार्यकारी सदस्य और एसोसिएशन ऑफ स्टडीज इन न्यूरोसाइंसेज के प्रमुख अन्वेषक डॉ. नरेश पुरोहित ने कहा कि दुनिया भर में हर साल करीब 1.2 करोड़ लोगों को नया स्ट्रोक होता है, जबकि इससे जुड़ी जटिलताओं के कारण 65 लाख से अधिक लोगों की मौत हो जाती है। उन्होंने कहा कि भारत में हर 40 सेकंड में एक व्यक्ति स्ट्रोक का शिकार होता है और हर चार मिनट में एक व्यक्ति की इससे मौत हो जाती है।
डॉ. पुरोहित के अनुसार, पंजाब और हरियाणा में भी स्ट्रोक के बढ़ते मामले चिंता का विषय हैं। उन्होंने विभिन्न वैज्ञानिक अध्ययनों का हवाला देते हुए कहा कि इन राज्यों की आबादी में हृदय संबंधी बीमारियों का पारिवारिक इतिहास स्ट्रोक के जोखिम से जुड़ा हो सकता है। पंजाब और हरियाणा के खानपान में नमक, चीनी और संतृप्त वसा की अधिक मात्रा भी रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल बढ़ाकर जोखिम में इजाफा कर सकती है।
एनबीआरसी के तंत्रिका वैज्ञानिक डॉ. गुप्ता ने कहा कि आधुनिक जीवनशैली धमनियों को समय से पहले बूढ़ा कर रही है। उन्होंने बताया कि भारत में स्ट्रोक के 15 से 20 प्रतिशत मरीज 45 वर्ष से कम उम्र के हैं, जबकि वैश्विक स्तर पर यह अनुपात 10 प्रतिशत से कम बताया जाता है।
विशेषज्ञों ने कम उम्र में मधुमेह, उच्च रक्तचाप, धूम्रपान, वायु प्रदूषण, लगातार तनाव और अपर्याप्त नींद को बढ़ते जोखिम से जोड़ा। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक स्क्रीन के सामने रहने वाले शहरी पेशेवरों, सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र के कर्मचारियों और विद्यार्थियों में शारीरिक गतिविधियों की कमी तथा अनियमित नींद से रक्त वाहिकाओं संबंधी जोखिम बढ़ सकता है।
विशेषज्ञों ने स्वस्थ जीवनशैली अपनाने, पर्याप्त नींद लेने, नियमित शारीरिक गतिविधि करने और रक्तचाप एवं मधुमेह को नियंत्रित रखने की जरूरत पर जोर दिया।
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