पांढुर्णा , सितंबर 04 -- मध्यप्रदेश के पांढुर्णा में सड़क किनारे फुटपाथ पर लगाया गया सिम पॉइंट सेल कथित तौर पर साइबर ठगी का जरिया बन गया। आरोपियों ने सिम लेने पहुंचे लोगों को दो जीबी मोबाइल डाटा मुफ्त देने का झांसा देकर उनके आधार कार्ड लिए और उन्हें सिम देने के बजाय कथित तौर पर उन्हीं दस्तावेजों के आधार पर सिम एक्टिवेट कर लीं। बाद में इन सिम का इस्तेमाल साइबर धोखाधड़ी में किए जाने का मामला सामने आया है।
पांढुर्णा कोतवाली पुलिस ने जांच के बाद दो युवकों अर्थव पिता रंजीत बंसोड़ और रूद्र राऊत को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार अब तक चार लोगों के नाम से जारी सिम के माध्यम से दो लाख रुपये से अधिक की साइबर ठगी सामने आई है। पुलिस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
पुलिस के अनुसार शिकायत मिलने के बाद थाना प्रभारी अमित दाणी ने जांच शुरू की। जांच में ग्राम भंदारगोदी निवासी अर्थव बंसोड़ पर संदेह हुआ। जांच में सामने आया कि अर्थव ने एक मार्च से 17 जुलाई 2026 के बीच पांढुर्णा नगर की मुख्य सड़क के किनारे फुटपाथ पर सिम बेचने के लिए पॉइंट सेल लगाया था।
आरोप है कि पॉइंट सेल पर सिम लेने पहुंचे लोगों को दो जीबी मोबाइल डाटा मुफ्त देने का झांसा देकर ग्राम भंदारगोदी निवासी जान्हवी पिता अरविंद वासाड़े, घनपेठ वार्ड निवासी तुषार पिता कैलाश सावरकर, ग्राम तिगांव निवासी मोहिनी पिता रामदास बोबड़े और ग्राम देवखापा निवासी अमरू पिता गजमू कवडेती के आधार कार्ड लिए गए। बाद में उन्हें सिम उपलब्ध नहीं कराई गई और उन्हीं के नाम से सिम एक्टिवेट कर ली गईं।
पुलिस के मुताबिक अर्थव ने अपने सहपाठी मित्र रूद्र राऊत के साथ मिलकर इन सिम को एक्टिवेट किया और कथित तौर पर बाद में इन मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल साइबर धोखाधड़ी में किया गया। जांच में 24 हजार, 32 हजार, 40 हजार, 40 हजार और एक लाख 20 हजार रुपये की संदिग्ध साइबर धोखाधड़ी सामने आई है। पुलिस इन लेनदेन की कड़ियों को जोड़ते हुए रकम के गंतव्य खातों की जानकारी जुटा रही है।
पुलिस का कहना है कि पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 316(2), 318(4), सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66(सी) तथा दूरसंचार अधिनियम 2023 की धारा 42(3)(ई) और 42(6) के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। दोनों आरोपियों को शुक्रवार को न्यायालय में पेश किया जाएगा।
पुलिस अब यह पता लगा रही है कि इन सिम का इस्तेमाल किन मोबाइल उपकरणों में किया गया, किन लोगों से संपर्क हुआ, साइबर ठगी की रकम किन खातों में स्थानांतरित हुई और नेटवर्क में अन्य कौन लोग शामिल हैं। पुलिस डिजिटल साक्ष्यों, बैंक लेनदेन और सिम सक्रियकरण से जुड़े रिकॉर्ड की जांच कर रही है।
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