नयी दिल्ली , अक्टूबर 06 -- केन्द्रीय आदिवासी कार्य मंत्री जुएल ओरांव ने मंगलवार को यहां आदिवासी समुदायों के लिए संवैधानिक अधिकार एवं कानूनी अधिकार पर के दो दिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन किया।

आधिकारिक जानकारी के अनुसार सम्मेलन का मकसद देश भर के अलग-अलग राज्यों/ केन्द्र शासित प्रदेशों के आदिवासी कल्याण एवं राजस्व विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ जाने-माने विशेषज्ञों को एक साथ लाना है, ताकि आदिवासी समुदाय को अपने संवैधानिक अधिकार पाने में आने वाली मुश्किलों पर विचार-विमर्श किया जा सके और संभावित सुझाव तथा सुधार के उपाय सुझाए जा सकें।

श्री ओरांव ने सम्मेलन में भाग ले रहे लोगों से इस मौके पर अपने अनुभव और अच्छे कार्यों को साझा करने की अपील की, ताकि दूसरे लोग आदिवासी समुदाय के संवैधानिक अधिकारों और उनकी सुरक्षा से जुड़े मामलों पर एक-दूसरे से सीख सकें। उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि समुदायों के सामने आने वाली चुनौतियों को क्षेत्र के अधिकारियों को समझना ज़रूरी है, इससे केंद्र सरकार समाधान और व्यावहारिक दिशा-निर्देश बना सकेगी।

केन्द्रीय आदिवासी कार्य राज्य मंत्री दुर्गादास उइके ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए लोगों को संबोधित किया। उन्होंने धोखाधड़ी वाले दावों के खिलाफ असरदार सुरक्षा उपाय बनाये रखते हुए आसान, पारदर्शी, समयबद्ध और नागरिकों के लिए आसान की प्रक्रिया ज़रूरत पर ज़ोर दिया।

मंत्रालय की सचिव रंजना चोपड़ा ने उम्मीद जताई कि दो दिन के इस सम्मेलन में आम चुनौतियां, दोहराने लायक सबसे अच्छे कार्य, रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण की भूमिका, आसान दस्तावेजीकरण, ऑनलाइन ट्रैकिंग, असरदार शिकायत निवारण और मज़बूत अंतरराज्यीय सत्यापन प्रणाली सामने आएंगे।

इस सम्मेलन में लगभग 30 राज्यों/ केन्द्र शासित प्रदेशों के 75 से ज़्यादा प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं।

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