मुंबई , अक्टूबर 24 -- महाराष्ट्र में जनजातीय अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठन 'श्रमजीवी संघटना' ने शनिवार को कहा कि वह अपनी मांगों के हल निकालने के लिए 27 अक्टूबर को एक पैदल मार्च का आयोजन करेगा।
संगठन के अनुसार यह मार्च ठाणे जिले के भिवंडी से दक्षिण मुंबई स्थित मंत्रालय (राज्य सचिवालय प्रशासनिक भवन) तक जायेगा। संगठन की प्रमुख मांगों में वन अधिकार अधिनियम के लंबित दावे और आधार कार्ड जैसे सरकारी दस्तावेजों का अभाव प्रमुख है। श्रमजीवी संघटना की प्रवक्ता सीता घाटल ने बताया कि यह मार्च 'संविधान हक संघर्ष मोर्चा' के बैनर तले निकाला जाएगा।
उन्होंने संवाददाताओं से कहा, "आजादी के 80 साल बाद भी जनजातीय समुदाय अब राजनीतिक नेताओं और सरकार के केवल अस्पष्ट मौखिक आश्वासनों को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है। जब तक हमें सरकार से स्पष्ट लिखित निर्णय नहीं मिल जाते, हमारा यह मार्च वापस नहीं लिया जाएगा।"उन्होंने कहा, "हमारी प्राथमिक मांगों में जनजातीय छात्रों के लिए कक्षा 12 तक गारंटीकृत मुफ्त और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, तथा यह लिखित प्रतिबद्धता शामिल है कि इस वर्ष 15 दिसंबर तक वन अधिकार अधिनियम के सभी लंबित दावों को पूरी तरह से संसाधित और निस्तारित किया जाएगा।"विरोध मार्च की तैयारियों की जानकारी देते हुए सुश्री घाटल ने बताया कि आज भी हजारों आदिवासियों के पास आधार कार्ड और बुनियादी दस्तावेज नहीं हैं। जनजातीय समुदाय भूमि अधिकारों, शिक्षा, दस्तावेजों और रोजगार से वंचित है और उनकी सभी मांगें इन्हीं मूलभूत मुद्दों पर आधारित हैं।
उन्होंने कहा कि श्रमजीवी संघटना 15 दिसंबर, 2026 तक हजारों लंबित वन अधिकार अधिनियम के दावों का समाधान कराने और पात्र आदिवासी किसानों को आधिकारिक तौर पर भूमि का मालिकाना हक सौंपने के लिए इस मार्च का आयोजन कर रही है।
सुश्री घाटल ने बताया कि संगठन जनजातीय बच्चों के लिए 3 से 18 वर्ष की आयु (कक्षा 12 तक) मुफ्त, गारंटीकृत और अनिवार्य उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा, शिक्षकों के सभी रिक्त पदों को भरने तथा सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों में मुफ्त इलाज की मांग कर रहा है।
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