बैतूल , मार्च 12 -- मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में आदिवासी भूमि अधिकारों को लेकर जय आदिवासी युवा शक्ति संगठन के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन कर संविधान की पांचवीं अनुसूची के प्रावधानों को प्रभावी रूप से लागू करने की मांग की।
संगठन के कार्यकर्ताओं और आदिवासी समाज के लोगों ने रानी दुर्गावती ऑडिटोरियम में सभा आयोजित करने के बाद रैली निकालते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचकर राज्यपाल के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा।
जयस के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि संविधान लागू होने के बाद भी आदिवासी समाज को भूमि और प्राकृतिक संसाधनों पर उनके अधिकार पूरी तरह नहीं मिल पाए हैं। उनका कहना था कि पांचवीं अनुसूची लागू होने के बावजूद अनुसूचित क्षेत्रों में संसाधनों और जमीन की सुरक्षा के लिए अपेक्षित कदम नहीं उठाए गए हैं।
प्रदर्शन के दौरान संगठन के नेताओं ने कहा कि पांचवीं अनुसूची की धारा पांच के तहत अनुसूचित क्षेत्रों में आदिवासी भूमि और संसाधनों की सुरक्षा की जिम्मेदारी राज्यपाल पर होती है। इसके बावजूद आदिवासी समुदाय को उनकी जमीनों से बेदखल किए जाने और प्रशासनिक आदेशों के माध्यम से अधिकार सीमित किए जाने के आरोप लगाए गए।
ज्ञापन में वन अधिकार कानून 2006 के क्रियान्वयन को लेकर भी अनियमितताओं का आरोप लगाया गया। संगठन का कहना है कि कई वनग्रामों में वन अधिकार दावों की प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से नहीं की गई और आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराए बिना ही दावे आमंत्रित कर बाद में उन्हें निरस्त किया गया।
जयस नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि कई स्थानों पर पट्टे की भूमि को वन भूमि बताकर वन अपराध दर्ज किए जा रहे हैं और जप्ती की कार्रवाई की जा रही है, जिससे आदिवासी समाज में असंतोष बढ़ रहा है।
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