अगरतला , जनवरी 20 -- त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के अध्यक्ष माणिक सरकार ने राज्य की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और टिपरा मोथा गठबंधन सरकार की आलोचना करते हुए कहा है कि कोकबोरोक भाषा से जुड़े विवाद के कारण आदिवासी लोगों के असली मुद्दे नज़रंदाज़ हो रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि कोकबोरोक त्रिपुरा के बोरोक और आदिवासी समाज की भाषा है जिसे बंगाली और रोमन दोनों तरह की लिपि में लिखा जाता है। त्रिपुरा में इस समय कई छात्र संगठन मांग कर रहे हैं कि इस भाषा को स्कूली किताबों और सरकारी कार्यालयों में रोमन लिपि में लिखा जाए।
श्री सरकार ने आरोप लगाया कि भाजपा शासन के दौरान पिछले कुछ वर्षों में खाना, पोषण, साफ पानी, बिजली, संचार और काम के मौके जैसी बुनियादी ज़रूरत की चीजे़ं धीरे-धीरे कम होती जा रही हैं।
उन्होंने मौजूदा भाजपा नेतृत्व वाली राज्य सरकार और टिपरा मोथा पार्टी के तहत 'त्रिपुरा जनजातीय क्षेत्र स्वायत्त जिला परिषद' के प्रशासन की योजनाओं पर सवाल उठाए, खासकर रिटायर्ड जिला परिषद कर्मचारियों की बकाया पेंशन जैसे मुद्दों पर। त्रिपुरा उच्च न्यायालय के नौ प्रतिशत ब्याज के साथ बकाया चुकाने के आदेश के बावजूद, अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गयी है।
उन्होंने कहा कि किसी ने भी बेरोजगारी, गरीबी, कुपोषण और काम के लिए युवाओं के राज्य से बाहर पलायन जैसी सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों से निपटने के लिए कोई कार्रवाई नहीं की। श्री सरकार ने अपर्याप्त मुआवजे के कारण होने वाली मौतों और उनके परिवारों को होने वाली मुश्किलों पर चिंता जताई है।
उन्होंने बिजली, सड़कों, शिक्षा, स्वास्थ्य और सिंचाई प्रणालियों को बनाए रखने में नाकाम रहने के लिए राज्य सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि बार-बार बिजली कटौती, स्वास्थ्य सेवाओं में रुकावट और बुनियादी मेडिकल आपूर्ति की कमी जैसे मुद्दे लोगों के लिये परेशानी खड़ी कर रहे हैं।
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