रायगढ़ , अगस्त 13 -- छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने गुरुवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार पर आदिवासियों की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार केवल दिखावा कर रही है और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय 'रिमोट कंट्रोल' की तरह काम कर रहे हैं। उन्होंने भाजपा की तिरंगा यात्रा को 'छद्म राष्ट्रवाद' करार देते हुए आरोप लगाया कि इसके जरिए लोगों को भ्रमित करने की कोशिश की जा रही है।

लैलूंगा विधायक विद्यावती सिदार के पति के निधन पर शोक व्यक्त करने रायगढ़ पहुंचे बघेल ने सर्किट हाउस में कांग्रेस पदाधिकारियों से मुलाकात के बाद पत्रकारों से बातचीत में आदिवासी दिवस, बस्तर में स्वतंत्रता दिवस और तिरंगा यात्रा सहित विभिन्न मुद्दों पर भाजपा को घेरा।

विश्व आदिवासी दिवस पर राज्य सरकार की ओर से कार्यक्रम आयोजित नहीं किए जाने को लेकर श्री बघेल ने कहा, "सरकार केवल दिखावा कर रही है और विष्णुदेव साय रिमोट कंट्रोल हैं, जैसे रिमोट दबाया जाता है उस तरह से वो काम कर रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी की सोच कभी भी आदिवासियों को आगे बढ़ाने की नहीं रही और राष्ट्रपति भी आदिवासी, यहां के मुख्यमंत्री भी आदिवासी लेकिन आदिवासी दिवस पर कोई कार्यक्रम नहीं किया गया। इसका मतलब ये है कि आदिवासियों के सुख-दुख में आप भागीदार नहीं हैं और उन्हें आप अपने हिसाब से हांकना चाहते हैं।"उन्होंने कहा, "आदिवासी की बात नहीं सुनते, जबकि नौ अगस्त को आदिवासी समाज लगातार छुट्टी की मांग कर रहे थे। डॉ. रमन सिंह 15 साल मुख्यमंत्री रहे लेकिन छुट्टी नहीं दी, जबकि हमारी सरकार आई तो हमने अवकाश घोषित किया और हमने सभी ब्लॉकों में, सभी गांवों में उत्साहपूर्वक कार्यक्रम आयोजित किए। जबसे विष्णुदेव की सरकार बनी तब से ये काम बिल्कुल बंद कर दिया गया है और आदिवासी समाज इसे देख रहा है।"बस्तर में पहली बार तिरंगा फहराए जाने संबंधी भाजपा के दावों पर सवाल उठाते हुए श्री बघेल ने कहा, "भाजपा की सरकार में जब रमन सिंह मुख्यमंत्री थे तब बस्तर की कई पंचायतों में चुनाव नहीं हुए, बहुत सारे गांवों में 15 अगस्त और 26 जनवरी को काले झंडे फहराए जाते थे लेकिन जब हमारी कांग्रेस की सरकार आई तो हमने वहां चुनाव भी करवाए और झंडे भी फहरवाए। भाजपा का ये कहना कि पहली बार तिरंगा झंडा फहरेगा, ये गलत है।"भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर निशाना साधते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, "इनको तो तिरंगे झंडे से कोई लेना-देना है ही नहीं। जब अंग्रेजों के साथ थे तब कांग्रेस के लोग तिरंगा लेकर निकलते थे, वन्देमातरम के गीत गाते थे और उन्हें कोड़े भी पड़ते थे और जेल भी जाते थे। तब ये लोग सूचना देते थे कि कौन तिरंगा यात्रा में है, कौन वन्देमातरम के गीत गा रहा है, तब ये सूचना देने वालों में से थे।"उन्होंने कहा, "बीते 52 सालों में आरएसएस के कार्यकाल में तिरंगा झंडा नहीं फहरा और अब ये तिरंगा यात्रा निकाल रहे हैं। ये छद्म राष्ट्रवाद है इनका, ये लोगों को भुलावे में लाने की कोशिश कर रहे हैं।"युवा पीढ़ी का उल्लेख करते हुए बघेल ने कहा, "अब ज़ेन जी जाग गया है। जो ये नई पीढ़ी ने कर दिखाया है वो बड़े-बड़े राजनीतिक दल के लोग नहीं कर पाए। मैं भी उसमें शामिल हूं। हम लोग भी मोदी और शाह को बाध्य नहीं कर पाए, भले ही हम लड़ते थे लेकिन नौजवान लड़के और लड़कियों ने पेपर लीक के मामले में धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा ले लिया।"उन्होंने कहा, "देश के बड़े नेता खुद की तुलना सरदार पटेल से करते थे, खुद को तुर्रम खान समझते थे लेकिन अब उनका सामना भी नहीं कर पाए और अब पार्लियामेंट में बच रहे हैं। पूरे देश की तस्वीर बदल रही है।"इससे पहले श्री बघेल ने सर्किट हाउस में कांग्रेस नेताओं और पदाधिकारियों से मुलाकात की। इसके बाद वह लैलूंगा विधायक विद्यावती सिदार के पति के निधन पर शोक संवेदना व्यक्त करने के लिए रवाना हुए।

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