जगदलपुर/कांकेर , मार्च 02 -- छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में इस बार होली केवल रंगों का उत्सव नहीं, बल्कि पुनर्वास और आत्मनिर्भरता की नई कहानी भी लेकर आई है। आत्मसमर्पित नक्सलियों द्वारा तैयार किए जा रहे हर्बल गुलाल और प्राकृतिक रंगों के विक्रय के लिए जिला कलेक्टर कार्यालय परिसर में नि:शुल्क स्टॉल उपलब्ध कराए गए हैं। प्रशासन की इस पहल को मुख्यधारा से जुड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
कांकेर जिले के अंतागढ़ क्षेत्र स्थित ग्राम चौगेल (मुल्ला) पुनर्वास केंद्र में आत्मसमर्पित नक्सली युवाओं को शासन की पुनर्वास नीति के तहत कौशल विकास प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसी क्रम में हर्बल गुलाल निर्माण का कार्य शुरू किया गया, जिसे अब बाजार भी मिल रहा है। होली पर्व को देखते हुए बड़ी मात्रा में प्राकृतिक गुलाल तैयार किया गया है।
इन रंगों की विशेषता यह है कि इन्हें पलाश के फूल, हल्दी, मेहंदी, चुकंदर, सिंदूर बीज सहित अन्य वन उत्पादों से तैयार किया गया है। पूरी प्रक्रिया रसायनमुक्त है और त्वचा के लिए सुरक्षित मानी जा रही है। स्थानीय संसाधनों के उपयोग से तैयार इन उत्पादों में बस्तर की खुशबू और परंपरा की झलक दिखाई देती है।
जिला प्रशासन ने इन उत्पादों की बिक्री को प्रोत्साहन देने के लिए कलेक्टर कार्यालय परिसर में स्टॉल हेतु स्थान नि:शुल्क उपलब्ध कराया है, ताकि अधिक से अधिक लोग इन रंगों तक पहुंच सकें। इससे आत्मसमर्पित युवाओं को सीधा बाजार और बेहतर आय का अवसर मिल रहा है।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आकाश श्रीश्रीमाल ने बताया कि पुनर्वास नीति का उद्देश्य केवल आत्मसमर्पण तक सीमित नहीं है, बल्कि स्थायी आजीविका और सामाजिक स्वीकृति सुनिश्चित करना है। हर्बल गुलाल निर्माण जैसे कार्यों से जुड़े युवाओं में आत्मविश्वास बढ़ा है और वे सम्मानपूर्वक जीवन यापन की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
पुनर्वास केंद्र से जुड़े युवाओं ने भी इस पहल को जीवन में सकारात्मक मोड़ बताया। उनका कहना है कि पहले भविष्य अनिश्चित था लेकिन प्रशिक्षण और प्रशासनिक सहयोग से स्वरोजगार का मार्ग मिला है। अब वे समाज के साथ जुड़कर स्थिर और सम्मानजनक जीवन की ओर अग्रसर हैं।
स्थानीय स्व-सहायता समूहों ने भी तकनीकी सहयोग प्रदान किया है, जिससे उत्पाद की गुणवत्ता और पैकेजिंग बेहतर हुई है। होली के मद्देनजर इन प्राकृतिक रंगों की मांग बढ़ रही है, जिससे जुड़े लोगों की आय में वृद्धि की संभावना जताई जा रही है।
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