नयी दिल्ली , अप्रैल 22 -- मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ने कहा है कि पहलगाम हमले की बरसी इस बार सिर्फ शोक का दिन नहीं रही बल्कि यह दिन एक साफ संदेश बनकर उभरा कि आतंकवाद अब किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

श्री इंद्रेश कुमार ने बुधवार को पहलगाम हमले की बरसी पर कहा कि "ऑपरेशन सिंदूर" कोई अस्थायी कदम नहीं, बल्कि आतंकवाद के खात्मे तक चलने वाला मिशन है। उन्होंने कहा कि अब भारत सहने वाला देश नहीं रहा। अगर पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद ने दोबारा सिर उठाया तो जवाब पहले से ज्यादा कड़ा और निर्णायक होगा। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई पहलगाम के हर पीड़ित के आंसू का जवाब है।

उन्होंने पाकिस्तान की नीतियों की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि आतंकवाद को संरक्षण देने वाली नीतियों का अंत तय है। उनके अनुसार पाकिस्तान आंतरिक अस्थिरता से जूझ रहा है और आने वाले समय में इसके गंभीर परिणाम सामने आएंगे। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान का कब्जे वाला कश्मीर (पीओके) एक दिन भारत का हिस्सा बनेगा, यह केवल दावा नहीं, बल्कि भविष्य की दिशा है।

राष्ट्रीय शैक्षणिक संस्था आयोग (एनसीएमई) के कार्यवाहक अध्यक्ष डॉ. शाहिद अख्तर ने कहा कि पहलगाम जैसी घटनाएं केवल सुरक्षा बलों के लिए चुनौती नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए चेतावनी हैं। उन्होंने जोर दिया कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में हर नागरिक की भागीदारी जरूरी है। सरकार को और सख्त कदम उठाने चाहिए, ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।

सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. शालिनी अली ने कहा कि पहलगाम में जिन परिवारों ने अपने अपनों को खोया, उनके दर्द को देश ने महसूस किया है। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना ने इसका जवाब दिया है लेकिन अगर जरूरत पड़ी तो और भी कड़े कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने देश की महिलाओं को भी इस लड़ाई में मजबूती से खड़े रहने का आह्वान किया।

मुस्लिम राष्ट्रीय मंच की ओर से कहा गया है कि पहलगाम की बरसी ने देश को फिर याद दिलाया कि आतंकवाद कोई साधारण घटना नहीं, बल्कि राष्ट्र की आत्मा पर सीधा प्रहार है। इस बार देश ने सिर्फ आंसू नहीं बहाए, उसने अपने भीतर उबल रहे आक्रोश को एक स्पष्ट संकल्प में बदल दिया। जब तक आतंक की आखिरी जड़ खत्म नहीं होती, यह लड़ाई थमने वाली नहीं। मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के नेतृत्व में देशभर में आतंकवाद के खिलाफ जन आक्रोश देखने को मिला।

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