दुबई , अप्रैल 17 -- अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीयू) क्रिकेट कनाडा से जुड़े भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच कर रही है। इसमें भारत और श्रीलंका में हुए पुरुष टी-20 विश्व कप के दौरान कनाडा से जुड़ा हुआ एक मैच भी शामिल है।

क्रिकइन्फो की रिपोर्ट के अनुसार एसीयू के पास दो सक्रिय जांचें लंबित है। ये जांचें क्रिकेट कनाडा के अलग-अलग पहलुओं और अंतरराष्ट्रीय व घरेलू स्तर पर आईसीसी के एंटी-करप्शन कोड के उल्लंघन के आरोपों से जुड़ी हैं।

इन आरोपों का खुलासा 'करप्शन, क्राइम और क्रिकेट' नामक एक डॉक्यूमेंट्री में हुआ, जिसे कनाडा के इन्वेस्टिगेटिव प्रोग्राम द फिफ्थ इस्टेट ने बनाया है। 43 मिनट की यह फिल्म क्रिकेट कनाडा में भ्रष्टाचार और प्रशासन से जुड़े कई गंभीर आरोपों की पड़ताल करती हुई दिखती है। इस डॉक्यूमेंट्री को शुक्रवार को सार्वजनिक प्रसारक, कनैडियन ब्रॉडकास्टिंग कार्पोरेशन (सीबीसी) ने प्रसारित किया।

डॉक्यूमेंट्री के अनुसार, विश्व कप में भ्रष्टाचार का आरोप कनाडा और न्यूजीलैंड के मैच से जुड़ा है। जांच का केंद्र न्यूजीलैंड की पारी का पांचवां ओवर है, जब कनाडा कप्तान दिलप्रीत बाजवा गेंदबाजी करने आए। बाजवा को टूर्नामेंट शुरू होने से केवल तीन हफ्ते पहले कप्तान बनाया गया था।

मुख्य रूप से बल्लेबाजी ऑलराउंडर और ऑफ स्पिन गेंदबाज बाजवा ने गेंद तब संभाली, जब न्यूजीलैंड का स्कोर 35 रन पर दो विकेट था। कनाडा ने तेज गेंदबाज़ जसकरण सिंह और डिलन हेलिगर से शुरुआत की थी और उन्होंने अपने पहले ओवर में क्रमशः 15 और 14 रन दिए। इसके बाद तीसरे ओवर में साद बिन जफर को लाया गया, जिन्होंने मेडेन ओवर विकेट डाला। चौथे ओवर में हेलिगर ने एक विकेट लिया और फिर बाजवा आए। उन्होंने ओवर की शुरुआत नो-बॉल से की, फिर लेग साइड पर वाइड डाली और कुल 15 रन दे बैठे।

दूसरी जांच एक टेलीफोन कॉल की रिकॉर्डिंग से जुड़ी है, जिसमें उस समय के कनाडा कोच ख़ुर्रम चौहान यह दावा करते हैं कि क्रिकेट कनाडा के कुछ सीनियर (अब पूर्व) बोर्ड सदस्यों ने उन पर राष्ट्रीय टीम में कुछ खिलाड़ियों को चुनने का दबाव डाला। यह ऑडियो पिछले साल लीक हुआ था और तब से एसीयू इसकी जांच कर रही है। इस रिकॉर्डिंग में मैच फ़िक्सिंग की कोशिशों के भी आरोप हैं, हालांकि उन्हें साबित करना मुश्किल बताया गया है।

आईसीसी की इंटीग्रिटी यूनिट के अंतरिम जनरल मैनेजर एंड्रयू एफग्रेव ने बयान में कहा, "एसीयू को सीबीसी द्वारा प्रसारित इस कार्यक्रम की जानकारी है। हमारी प्रक्रिया के अनुसार, हम इसमें लगाए गए आरोपों के विवरण पर टिप्पणी नहीं कर सकते। आईसीसी सदस्यों से जुड़े प्रशासनिक मामलों को आईसीसी अपने संवैधानिक नियमों के तहत देखता है। आईसीसी की एंटी-करप्शन यूनिट तीन मुख्य कार्यों पर काम करती है- इंटेलिजेंस, रोकथाम और जांच। ये सभी साथ-साथ चलते हैं और जहां भी ईमानदारी पर ख़तरा होता है, वहां लागू होते हैं।"इस डॉक्यूमेंट्री में एक और पूर्व कोच पुबुदु दसानायके का इंटरव्यू भी शामिल है, जिन्होंने 2024 टी-20 विश्व कप के लिए टीम चयन में उन पर दबाव डाले जाने का आरोप लगाया। द फ़िफ़्थ इस्टेट के अनुसार, बोर्ड ने उन्हें कुछ खिलाड़ियों को चुनने के लिए "मज़बूर" करने की कोशिश की और मना करने पर उनका कॉन्ट्रैक्ट ख़त्म करने की धमकी दी। दसानायके ने गलत तरीके से नौकरी से निकाले जाने के खिलाफ केस भी किया है।

पिछले एक साल में क्रिकेट कनाडा प्रशासनिक रूप से उथल-पुथल से गुज़रा है। पूर्व मुख्य कार्यकारी सलमान खान को पहले नियुक्त किया गया और बाद में उन्हें हटाया गया। उनकी नियुक्ति पर आईसीसी ने नोटिस दिया था क्योंकि सलमान ने अपने पुराने आपराधिक मामलों का खुलासा नहीं किया था। सलमान पर कैलगरी पुलिस ने चोरी और धोखाधड़ी के आरोप लगाए हैं, हालांकि उन्होंने इन आरोपों से इनकार किया है। इस महीने की शुरुआत में अरविंदर खोसा को बोर्ड का अध्यक्ष चुना गया, जिन्होंने अमजद बाजवा की जगह ली। कनाडा के खिलाड़ियों को 2024 टी-20 विश्व कप की प्राइज मनी मिलने में देरी का सामना करना पड़ा था और डॉक्यूमेंट्री में दावा किया गया है कि जुलाई 2025 से खिलाड़ियों के पास अनुबंध नहीं था।

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