विजयवाड़ा , मार्च 28 -- भारतीय पत्रकार संघ (आईजेयू) के अध्यक्ष के. श्रीनिवास रेड्डी ने शनिवार को 'श्रमजीवी पत्रकार कानून' लागू करने, एक नया वेतन बोर्ड गठित करने और मीडिया की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए नए कानून बनाने की मांग की।

श्री रेड्डी शनिवार को यहां आयोजित आईजेयू के 11वें पूर्ण सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि पत्रकारों के वेतन में लगभग दो दशकों से कोई संशोधन नहीं हुआ है, जिससे उनकी स्थिति असंगठित क्षेत्र के कर्मचारियों से भी बदतर हो गयी है। उन्होंने कहा, "एक मजबूत और स्वतंत्र प्रेस के बिना लोकतंत्र काम नहीं कर सकता। दुर्भाग्य से मीडिया की न केवल उपेक्षा की जा रही है, बल्कि सरकार द्वारा इसे सुनियोजित तरीके से नियंत्रित भी किया जा रहा है।"उन्होंने कहा कि काम के निर्धारित घंटे और रात्रि ड्यूटी के नियमों जैसे बुनियादी मुद्दों को अक्सर प्रबंधन द्वारा नजरअंदाज कर दिया जाता है।

उन्होंने कहा कि पारंपरिक मीडिया डिजिटल (सोशल) मीडिया के दबाव में ढह रहा है और अख़बारों तथा टेलीविज़न चैनलों को दर्शकों के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने बढ़ती असहिष्णुता के एक उदाहरण के तौर पर हाल ही में नयी दिल्ली में यूनाइडेट न्यूज ऑफ इंडिया (यूएनआई) के दफ़्तर पर अधिकारियों द्वारा किए गए कब्ज़े का ज़िक्र किया। उन्होंने कहा, "पूर्ण सत्र ने यह प्रस्ताव पारित किया है कि भारतीय प्रेस परिषद को पुनर्गठित करके 'भारतीय मीडिया परिषद' बनाया जाए, जिसे और भी अधिक शक्तियाँ प्राप्त हों।"वहीं, आईजेयू के महासचिव बलविंदर सिंह जम्मू ने कहा कि पूरे देश में पत्रकारों की स्थिति लगातार बिगड़ रही है। उन्होंने पत्रकारों पर होने वाले हमलों तथा उनकी हत्याओं की घटनाओं का हवाला दिया। उन्होंने कहा, "आज पत्रकार अपने कर्तव्यों का पालन करते समय देश के भीतर और बाहर दोनों ही जगहों पर गंभीर ख़तरे का सामना कर रहे हैं। अधिकारी अब अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और स्वतंत्र प्रेस के प्रति पहले से कहीं अधिक असहिष्णु होते जा रहे हैं।"इस दौरान विजयवाड़ा पश्चिम के विधायक वाई. सत्यनारायण (सुजाना चौधरी) ने सोशल मीडिया के बेरोकटोक बढ़ते प्रभाव पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा, "बिना किसी उचित नियंत्रण और संतुलन के सोशल मीडिया अब तेज़ी से 'असामाजिक मीडिया' में तब्दील होता जा रहा है। पत्रकारिता का मार्गदर्शन मूल्यों द्वारा होना चाहिए, और समाचारों की सत्यता को परखने के लिए उचित तंत्र विकसित किए जाने चाहिए। मैं किसी तरह के नियंत्रण की वकालत नहीं कर रहा हूँ, लेकिन उचित दिशा-निर्देशों का होना अत्यंत आवश्यक है।"वरिष्ठ पत्रकार आर.वी. रामा राव ने कहा कि मीडिया पर मालिकों का दबदबा लगातार बढ़ता जा रहा है। उन्होंने स्वतंत्र पत्रकारिता को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर ज़ोर देते हुए कहा, "आईजेयू को स्वतंत्र मीडिया को मज़बूत करने के ऐसे तरीके खोजने चाहिए, जो बिना किसी डर या पक्षपात के अपने विचार व्यक्त कर सकें।" तेलुगु देशम संसदीय दल के फ्लोर लीडर एल. कृष्ण देवरायलु ने भी इस सत्र को संबोधित किया।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित