नैनीताल , अक्टूबर 27 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय में महानिरीक्षक (आईजी) स्तर के दो आईपीएस अधिकारियों नीरू गर्ग और अरुण मोहन जोशी को केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय के अधीन प्रतिनियुक्ति पर भेजने के आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर मंगलवार को लंबी सुनवाई हुई।

दोनों पक्षों को सुनने के बाद कर्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई अगले दिन भी जारी रखने का निर्णय लिया है फिलहाल अदालत ने दोनों पक्षों से कैट (केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण) की पीठ के निर्णय और अन्य स्थानांतरण नियमावली का अवलोकन करने को कहा है।

मामले के अनुसार गृह मंत्रालय ने इसी साल 05 मार्च को आदेश जारी कर 2005 और 2006 बैच के आईपीएस अधिकारी नीरू गर्ग को भारत तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) में उप महानिरीक्षक (डीआईजी) और आईजी स्तर के अधिकारी अरुण मोहन जोशी को सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) में डीआईजी पद पर प्रतिनियुक्ति पर भेजने के निर्देश दिए थे।

इसके अगले दिन 06 मार्च को प्रदेश सरकार ने दोनों अधिकारियों को कार्यमुक्त करने का आदेश पारित किया। दोनों अधिकारियों ने प्रदेश सरकार के इस कदम को हाईकोर्ट में चुनौती दी। कोर्ट ने मामला केंद्रीय अधिकरण को भेज दिया था। प्रदेश सरकार ने आदेश को खंडपीठ में चुनौती दी। राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि दोनों अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति सही है।

आज सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने केंद्र और राज्य सरकार से पूछा कि इस रैंक के कितने पदों पर अधिकारियों को डेपुटेशन पर भेजा जाना है और कितने पद स्थायी हैं। जवाब में बताया गया कि 16 ऐसे पद हैं जिन पर डेपुटेशन के आधार पर अधिकारी केंद्र में भेजे जा सकते हैं, जबकि शेष पद राज्य सरकार के अधीन हैं।

इस मामले में कल भी सुनवाई होगी।

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