गौतमबुद्धनगर , जुलाई 02 -- उत्तर प्रदेश में जिला गौतमबुद्धनगर की साइबर अपराध पुलिस ने साइबर ठगी के मामले में बड़ी सफलता हासिल करते हुए गिरोह से जुड़े चार आरोपियों को नोएडा से गिरफ्तार किया है। साइबर अपराधियों ने आईजीएल कंपनी का कर्मचारी बनकर एक उपभोक्ता को बिल भुगतान के नाम पर फर्जी लिंक भेजा था। लिंक पर क्लिक करते ही पीड़ित के मोबाइल का अनाधिकृत एक्सेस प्राप्त कर लिया गया और उसके बैंक खातों से करीब 21.27 लाख रुपये की साइबर ठगी की गई।
पुलिस ने गुरुवार को कार्रवाई की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अभिसूचना संकलन एवं इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के विश्लेषण के आधार पर कार्रवाई करते हुए आरोपियों को दबोचा। उनके कब्जे से घटना में प्रयुक्त चार मोबाइल फोन भी बरामद किए गए हैं।
जांच में सामने आया कि गिरफ्तार आरोपी साइबर अपराधियों को 10 से 20 प्रतिशत कमीशन के बदले अपने क्रेडिट कार्ड उपलब्ध कराते थे, जिनके माध्यम से ठगी की रकम को ट्रांसफर किया जाता था। गिरफ्तार आरोपियों में सचिन कुमार (28), निवासी थाना क्रॉसिंग रिपब्लिक, गाजियाबाद, शहनवाज शेख (27), निवासी बिसरख, गौतमबुद्धनगर, शिवम पाण्डेय (22), निवासी बिसरख तथा शुभम कुमार सिंह (26), निवासी बिसरख, गौतमबुद्धनगर शामिल हैं।
पुलिस जांच में पता चला कि सचिन कुमार के क्रेडिट कार्ड में ठगी की 1,49,490 रुपये की राशि प्राप्त हुई थी, जबकि शहनवाज शेख के कार्ड में कुल 4,78,000 रुपये (2,56,000 रुपये और 2,22,000 रुपये) ट्रांसफर किए गए थे। वहीं शिवम पाण्डेय और शुभम कुमार सिंह भी साइबर अपराधियों को अपने क्रेडिट कार्ड उपलब्ध कराते थे। अब तक इनके खातों में करीब 6.5 लाख रुपये की ठगी की रकम आने की पुष्टि हुई है।
इस मामले में साइबर अपराध थाना में भारतीय न्याय संहिता की धार तथा 66, 66सी और 66डी आईटी एक्ट के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर गिरोह के अन्य सदस्यों और ठगी के नेटवर्क की जानकारी जुटा रही है। मामले में अग्रिम विधिक कार्रवाई जारी है।
साइबर अपराध पुलिस ने लोगों से अपील की है कि बिल भुगतान, केवाईसी या बैंक अपडेट के नाम पर आने वाले किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें। किसी भी व्यक्ति के बैंक या कंपनी अधिकारी होने के दावे की आधिकारिक नंबर पर पुष्टि अवश्य करें। मोबाइल में अनावश्यक एक्सेसिबिलिटी या स्क्रीन शेयरिंग की अनुमति न दें तथा ओटीपी, कार्ड विवरण और पासवर्ड किसी के साथ साझा न करें। यदि साइबर ठगी की आशंका हो तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें या राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। साथ ही पुलिस ने चेतावनी दी है कि कमीशन या लालच में अपना बैंक खाता या क्रेडिट कार्ड किसी अन्य व्यक्ति को उपलब्ध कराना भी साइबर अपराध में संलिप्तता माना जाता है और इसके लिए कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
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