रामनगर , मई 28 -- उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के मोहान स्थित इंडियन मेडिसिन फार्मास्युटिकल कारपोरेशन लिमिटेड (आईएमपीसीएल) को निजी हाथों में दिए जाने के विरोध में राज्य आंदोलनकारियों ने गुरुवार को गहरा आक्रोश व्यक्त किया है। आंदोलनकारियों ने केंद्र सरकार के इस फैसले को कर्मचारियों, किसानों और स्थानीय लोगों के हितों के खिलाफ बताते हुए जनप्रतिनिधियों से खुलकर सामने आने की मांग की है।

राज्य आंदोलनकारियों की समस्याओं के समाधान एवं उन्हें एकजुट करने के उद्देश्य से प्रदेश दौरे पर निकले सम्मान परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष एवं पूर्व दर्जा राज्य मंत्री धीरेन्द्र प्रताप के रामनगर पहुंचने पर आंदोलनकारियों की ओर से उनका स्वागत किया गया। इसके बाद लखनपुर स्पोर्ट्स क्लब में राज्य सेनानी मंच रामनगर के संयोजक चंद्रशेखर जोशी की अध्यक्षता और प्रभात ध्यानी के संचालन में बैठक आयोजित की गई।

बैठक में वक्ताओं ने कहा कि आयुष मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में संचालित देश की एकमात्र आयुर्वेदिक एवं यूनानी दवा निर्माण कंपनी आईएमपीसीएल मोहन को मुनाफे में होने के बावजूद निजी कंपनी को बेच दिया गया है। आंदोलनकारियों का आरोप है कि इस निर्णय से लंबे समय से कार्यरत स्थायी और अस्थायी कर्मचारियों के साथ-साथ किसानों की आजीविका पर संकट खड़ा हो गया है।

श्री धीरेन्द्र प्रताप ने केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टमटा , सांसद अजय भट्ट, सांसद अनिल बलूनी, विधायक महेश जीना, विधायक सरिता आर्य तथा विधायक दीवान सिंह बिष्ट से आईएमपीसीएल को बचाने के लिए आगे आने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि जनप्रतिनिधि इस मुद्दे पर चुप रहते हैं तो जनता उन्हें जवाबदेह बनाएगी।

बैठक में राज्य आंदोलनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की घोषणा के बावजूद राज्य आंदोलनकारियों और उनके आश्रितों को 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण का लाभ अब तक नहीं मिल पाया है। साथ ही वर्ष 2021 तक जमा चिह्नीकरण संबंधी आवेदनों का भी जिलाधिकारियों द्वारा निस्तारण नहीं किया जा रहा है।

बैठक में निर्णय लिया गया कि इन सभी मांगों को लेकर 29 मई को प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा जाएगा।

बैठक में प्रभात ध्यानी, चंद्रशेखर जोशी, इंद्र सिंह मनराल, अनिल अग्रवाल 'खुलासा', हाफिज सईद अहमद और नवीन नैथानी सहित कई राज्य आंदोलनकारी मौजूद रहे।

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