नयी दिल्ली , फरवरी 05 -- उच्चतम न्यायालय ने गुरुवार को तेलंगाना उच्च न्यायालय के उस फैसले को सही ठहराया है, जिसमें हैदराबाद में 'इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन एंड मीडिएशन सेंटर' (आईएएमसी) को कीमती सरकारी जमीन मुफ्त में देने के फैसले को रद्द कर दिया गया था।
न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति एस.वी.एन. भट्टी की पीठ ने आईएएमसी की उन याचिकाओं को खारिज कर दिया, जिनमें उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती दी गई थी। न्यायालय ने साफ कहा कि वह इस मामले में हस्तक्षेप नहीं करना चाहती। इससे पहले, न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा ने इस मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था।
तेलंगाना उच्च न्यायालय ने जून 2025 में अपने एक फैसले में राज्य सरकार के उस कदम पर रोक लगा दी थी, जिसके तहत हैदराबाद के रायदुर्ग गांव में बहुत महंगी जमीन इस सेंटर को बिना किसी पैसे के दे दी गई थी। इस सेंटर की शुरुआत 2021 में तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति एन.वी. रमना के समय हुई थी।
उच्च न्यायालय का मानना था कि सरकार जनता की संपत्ति की संरक्षक (ट्रस्टी) होती है और वह बिना किसी ठोस कारण या बड़े जनहित के, सरकारी जमीन मुफ्त में किसी को नहीं दे सकती। सरकार को इसके बदले उचित मुआवजा लेना चाहिए था।
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