नयी दिल्ली , जनवरी 21 -- चुनाव आयोग द्वारा आयोजित तीन दिवसीय भारत अंतरराष्ट्रीय लोकतंत्र और निर्वाचन प्रबंधन सम्मेलन (आईआईसीडीईएम-2026) का शुभारंभ करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बुधवार को कहा कि बीते दशकों में निर्वाचन प्रबंध निकायों की भूमिका का दायरा काफी फैला है।

कार्यक्रम की शुरुआत यहां भारत मंडपम में एक औपचारिक स्वागत समारोह के साथ की गयी। इसमें विभिन्न देशों से आये प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों का अभिनंदन किया गया।

सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में मुख्य चुनाव आयुक्त के साथ-साथ चुनाव आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधु और चुनाव आयुक्त डॉ. विवेक जोशी की उपस्थिति में लगभग 60 अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों का स्वागत किया गया। उद्घाटन सत्र में करीब एक हजार प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें 42 निर्वाचन प्रबंधन निकायों के प्रतिनिधि, 27 देशों के राजदूत एवं उच्चायुक्त, 70 से अधिक राष्ट्रीय संस्थानों के विशेषज्ञ, चुनाव आयोग के वरिष्ठ अधिकारी तथा देशभर से आए 36 मुख्य चुनाव अधिकारी शामिल थे।

मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि बीते दशकों में निर्वाचन प्रबंधन निकायों की भूमिका का दायरा काफी बढ़ा है। उन्होंने कहा कि विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में भारत 28 राज्यों और आठ केंद्रशासित प्रदेशों में लगभग 1.5 अरब आबादी के लिए अभूतपूर्व स्तर पर चुनावों का आयोजन करता है।

इस मौके पर डॉ. सुखबीर सिंह संधु ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि हर चुनाव के केंद्र में एक नागरिक होता है, जिसे यह भरोसा होता है कि उसकी पसंद का सम्मान और संरक्षण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस विश्वास की रक्षा करना निर्वाचन प्रबंधन निकायों की सामूहिक जिम्मेदारी है।

डॉ. विवेक जोशी ने अपने संबोधन में कहा कि आईआईसीडीईएम-2026 निर्वाचन प्रबंधन निकायों, शोधकर्ताओं, छात्रों और प्रैक्टिशनर्स को एक साझा मंच पर लाता है, जहां चुनावों को विभिन्न दृष्टिकोणों से समझने और उनके व्यावहारिक उपयोग पर चर्चा होती है।

सम्मेलन के विषय पर भारत अंतरराष्ट्रीय लोकतंत्र एवं निर्वाचन प्रबंधन संस्थान (आईआईआईडीईएम) के महानिदेशक राकेश शर्मा ने कहा कि भारत की अध्यक्षता का विषय एक समावेशी, शांतिपूर्ण, सहिष्णु और सुदृढ़ विश्व के लिए लोकतंत्र 21वीं सदी में लोकतंत्र की व्यापक और बहुआयामी भूमिका को दर्शाता है।

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