धनबाद , अक्टूबर 31 -- झारखंड के आईआईटी (आईएसएम) धनबाद में शनिवार को दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी 'क्रिटिकल मिनरल्स एंड रेयर अर्थ ( सीएम आरई 2026): स्ट्रैटेजिक इनेबलर्स ऑफ टेक्नोलॉजी एंड इंडस्ट्रियल ट्रांसफॉर्मेशन फॉर विकसित भारत' की शुरुआत हुई।

इसमें केंद्र सरकार के नीति आयोग, राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं, उद्योग जगत और शिक्षण संस्थानों के विशेषज्ञों ने भारत में क्रिटिकल मिनरल्स की उपलब्धता, प्रोसेसिंग, स्वदेशी तकनीक और इंडस्ट्रियल वैल्यू चेन को मजबूत बनाने पर चर्चा की।

आईआईटी (आईएसएम) धनबाद के फ्यूल, मिनरल्स एंड मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग (एफएमएमई) विभाग की ओर से इंडियन काउंसिल ऑफ केमिस्ट्स (आईसीसी) के 45वें वार्षिक राष्ट्रीय सम्मेलन के विशेष थीमैटिक सिम्पोजियम के रूप में टेक्समिन के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम का उद्घाटन नीति आयोग, भारत सरकार के सदस्य प्रो. गोबर्धन दास ने किया।

इस मौके पर इंडियन काउंसिल ऑफ केमिस्ट्स के अध्यक्ष प्रो. रंजीत कुमार वर्मा, संगोष्ठी के सेक्शनल प्रेसिडेंट प्रो. ध्रुव कुमार सिंह, एफएमएमई विभागाध्यक्ष प्रो. शत्रुघ्न सोरेन और संयोजक डॉ. बी. राजशेखर रेड्डी मौजूद थे।

उद्घाटन संबोधन में प्रो. गोबर्धन दास ने कहा कि क्रिटिकल मिनरल्स और रेयर अर्थ्स अब केवल खनिज संसाधन नहीं, बल्कि देश की सुरक्षा, रिन्यूएबल एनर्जी, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, डिफेंस और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम हैं। उन्होंने कहा कि केवल खनिज संपदा होना पर्याप्त नहीं है। भारत को एक्सप्लोरेशन से लेकर प्रोसेसिंग, रिफाइनिंग, एडवांस मटेरियल और मैन्युफैक्चरिंग तक पूरी वैल्यू चेन में अपनी क्षमता विकसित करनी होगी।

उन्होंने 2025 में शुरू किए गए नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन का उल्लेख करते हुए बताया कि इसके लिए सात वर्षों में करीब 34,300 करोड़ रुपये का वित्तीय प्रावधान किया गया है। उन्होंने सरकारी संस्थानों, रिसर्च लैबोरेटरी और इंडस्ट्री के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत बताई। रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट के घरेलू उत्पादन के लिए 7,280 करोड़ रुपये की योजना और सालाना 6,000 टन उत्पादन क्षमता का लक्ष्य भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कोयले की फ्लाई ऐश, रेड मड, ई-वेस्ट और औद्योगिक अवशेषों से उपयोगी खनिजों की रिकवरी पर भी जोर दिया।

स्वागत भाषण में प्रो. ध्रुव कुमार सिंह ने कहा कि भारत को खनिजों की खोज के साथ-साथ उनकी प्रोसेसिंग, सेपरेशन, एडवांस मटेरियल, मैन्युफैक्चरिंग और रिसाइक्लिंग की पूरी व्यवस्था विकसित करनी होगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि संगोष्ठी से ठोस सुझाव सामने आएंगे और रिसर्च संस्थानों तथा उद्योगों के बीच सहयोग बढ़ेगा। प्रो. शत्रुघ्न सोरेन ने रिसर्च, तकनीकी नवाचार और इंडस्ट्री के साथ सहयोग में विभाग की भूमिका पर प्रकाश डाला, जबकि प्रो. रंजीत कुमार वर्मा ने देश के प्राकृतिक और वैज्ञानिक संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल की जरूरत बताई।

उद्घाटन समारोह के बाद तीन तकनीकी सत्र और एक उच्चस्तरीय पैनल डिस्कशन आयोजित किया गया। पहले सत्र में क्रिटिकल मिनरल्स की पॉलिसी, संसाधन सुरक्षा और रणनीतिक प्राथमिकताओं पर चर्चा हुई। इसमें एटॉमिक मिनरल्स डायरेक्टरेट, इंडियन रेयर अर्थ्स लिमिटेड, न्यूक्लियर फ्यूल कॉम्प्लेक्स, नीति आयोग और सीएसआईआर-नेशनल मेटलर्जिकल लैबोरेटरी के विशेषज्ञों ने विचार रखे।

पैनल डिस्कशन में भारत के लिए सुरक्षित और सर्कुलर क्रिटिकल मिनरल्स एवं रेयर अर्थ वैल्यू चेन विकसित करने की चुनौतियों पर चर्चा हुई। तीसरे सत्र में नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, स्वदेशी तकनीक के विकास, रिसाइक्लिंग और उद्योगों के साथ साझेदारी पर विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए। कोयले से जुड़े संसाधनों और औद्योगिक अवशेषों से क्रिटिकल मिनरल्स की रिकवरी भी चर्चा का प्रमुख विषय रहा।

कार्यक्रम के संयोजक डॉ. बी. राजशेखर रेड्डी ने धन्यवाद ज्ञापन में संस्थान के नेतृत्व, इंडियन काउंसिल ऑफ केमिस्ट्स, टेक्समिन, विभिन्न संस्थानों, उद्योगों, वक्ताओं और आयोजन टीम के सहयोग के लिए आभार जताया।

संगोष्ठी के दूसरे दिन 1 नवंबर को टेक्समिन हॉल में दो तकनीकी सत्र आयोजित होंगे। चौथे सत्र में इंडस्ट्री के नजरिये से क्रिटिकल मिनरल्स, कमर्शियलाइजेशन, निवेश की संभावनाओं, स्वदेशी रेयर अर्थ मैग्नेट वैल्यू चेन, अर्बन माइनिंग और रिसाइक्लिंग पर चर्चा होगी।

पांचवें सत्र में भविष्य की तकनीकों के लिए प्राथमिक और द्वितीयक संसाधनों, सस्टेनेबल प्रोसेसिंग, सर्कुलर इकोनॉमी और मजबूत सप्लाई चेन पर विचार-विमर्श होगा। इसमें परमानेंट मैग्नेट से रेयर अर्थ की रिकवरी, औद्योगिक अवशेषों से कोबाल्ट की रिकवरी, ई-वेस्ट और इस्तेमाल हो चुकी लिथियम-आयन बैटरियों की रिसाइक्लिंग तथा कोयले के उप-उत्पादों से हेवी रेयर अर्थ एलिमेंट्स निकालने की तकनीकों पर चर्चा होगी। अंत में वैलेडिक्टरी सत्र के साथ संगोष्ठी का समापन होगा।

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