रुड़की , मई 08 -- केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल ने शुक्रवार को उत्तराखंड के रुड़की स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) में सेंटर फॉर रेगुलेटरी अफेयर्स का उद्घाटन किया। यह केंद्र फोरम ऑफ रेगुलेटर्स (एफओआर) और आईआईटी रुड़की की संयुक्त पहल है।

केंद्रीय मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि यह आईआईटी के सहयोग से स्थापित किया जाने वाला दूसरा ऐसा केंद्र है। इससे पूर्व भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली, केंद्रीय विद्युत विनियामक आयोग तथा ग्रिड कंट्रोलर ऑफ इंडिया लिमिटेड के सहयोग से एक समान सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किया गया था, जिसका उद्देश्य क्षेत्र में अनुसंधान, क्षमता निर्माण एवं नियामकीय उत्कृष्टता को और सुदृढ़ करना है। उन्होंने कहा कि यह तेजी से विकसित हो रहे विद्युत क्षेत्र में भारत की नियामकीय क्षमता को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जहाँ बढ़ती विद्युत मांग, बड़े पैमाने पर नवीकरणीय ऊर्जा एकीकरण, विस्तारित विद्युत बाजार तथा डिजिटल प्रौद्योगिकियों का बढ़ता उपयोग प्रमुख विशेषताएँ हैं।

श्री मनोहर लाल ने उम्मीद व्यक्त की कि यह केंद्र रेगुलेटरी सैंडबॉक्सिंग और डिमांड फ्लेक्सिबिलिटी जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा को आगे बढ़ाएगा तथा आने वाले समय में इन्हें विद्युत क्षेत्र के रणनीतिक उपकरणों के रूप में विकसित करने में सहायता करेगा। उन्होंने कहा कि आईआईटी रुड़की को अपनी प्रतिष्ठा के अनुरूप मौलिक अनुसंधान पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, जो न केवल बदलते परिदृश्य की समझ को और गहरा करे, बल्कि भविष्य के लिए नवाचारी एवं परिवर्तनकारी प्रौद्योगिकियों के विकास को भी गति प्रदान करे।

केंद्रीय विद्युत विनियामक आयोग तथा फोरम ऑफ रेगुलेटर्स (एफओआर) के अध्यक्ष जिष्णु बरुआ ने कहा कि फोरम ऑफ रेगुलेटर्स इस केंद्र को व्यापक भारतीय उद्योग के लिए नियामकीय क्षमता निर्माण के एक अग्रणी केंद्र के रूप में स्थापित होते देखना चाहता है। उच्च गुणवत्ता वाले अनुसंधान, प्रकाशनों और ज्ञान संसाधनों के माध्यम से यह केंद्र एक बड़े, जटिल और तेजी से विकसित हो रहे विद्युत क्षेत्र के प्रबंधन में भारत के अनुभव और विचार नेतृत्व को प्रदर्शित कर सकता है।

आईआईटी निदेशक प्रो. के.के. पंत ने कहा कि भारत की एक सुदृढ़, बुद्धिमान और सतत ऊर्जा पारिस्थितिकी तंत्र की दिशा में प्रगति के लिए अनुसंधान एवं संस्थागत सहयोग द्वारा समर्थित मजबूत नियामकीय नवाचार की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि आईआईटी रुड़की में सेंटर फॉर रेगुलेटरी अफेयर्स एक बहु-विषयक मंच के रूप में कार्य करेगा, जो ऊर्जा संक्रमण एवं अवसंरचना प्रशासन से जुड़ी उभरती चुनौतियों के समाधान हेतु अकादमिक जगत, नियामकों, नीति निर्माताओं एवं उद्योग को एक साथ जोड़ेगा।

उल्लेखनीय है कि एफओआर देश में एक वैधानिक निकाय है, जो केंद्रीय एवं राज्य विद्युत नियामकों को एक साथ लाकर विद्युत क्षेत्र में नियामकीय प्रक्रियाओं के समन्वय, सामंजस्य और सुदृढ़ीकरण हेतु कार्य करता है। इस केंद्र की स्थापना विद्युत क्षेत्र के नियामकीय पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से की गई है। यह केंद्रीय एवं राज्य आयोगों तथा अन्य प्रमुख हितधारकों के बीच नियामकीय ढाँचों की समझ को और गहरा करेगा, साथ ही डिस्कॉम की वित्तीय व्यवहार्यता, ऊर्जा बाजार, ऊर्जा संक्रमण तथा लागत अनुकूलन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर अध्ययन एवं अंतरालों की पहचान करेगा।

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