देहरादून/रुड़की , सितंबर 09 -- भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की (आईआईटी) ने कृषि निदेशालय, उत्तर प्रदेश (यूपी) सरकार और दो उद्योग साझेदारों मैसर्स कम्प्लाइंस कॉर्ट प्रा लि तथा मैसर्स त्रयम्भु टेक सॉल्यूशन्स प्रा लि के साथ कार्यक्रम दो त्रिपक्षीय समझौते (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए।
जलवायु-स्मार्ट कृषि को आगे बढ़ाने और सतत विकास को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में यह एमओयू "कार्बन क्रेडिट्स इनिशिएशन एंड इट्स बेनिफिट्स फॉर सस्टेनेबल एग्रीकल्चर इन उत्तर प्रदेश" के अंतर्गत सहयोग के लिए किए गए हैं। यह कार्यक्रम पब्लिक-प्राइवेट-एकेडमिक पार्टनरशिप के रूप में संरचित है और यूपी सरकार के स्वीकृत फ्रेमवर्क के अंतर्गत कार्यान्वित किया जा रहा है।
इस अवसर पर निदेशक, कृषि एवं संबद्ध सेवाएँ यूपी टीएम त्रिपाठी ने कहा कि यह साझेदारी यूपी में सतत कृषि पद्धतियों को उभरते कार्बन बाजारों के साथ एकीकृत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। सरकार, शिक्षा जगत और उद्योग को एक साथ लाकर यह पहल किसानों के लिए नए अवसर सृजित करने के साथ-साथ जलवायु लचीलापन, सतत संसाधन प्रबंधन और पर्यावरणीय रूप से उत्तरदायी कृषि विकास को मजबूत करने में सहायता करेगी।
कम्प्लाइंस कॉर्ट प्रा लि के सीईओ आलोक पांडेय ने कहा कि हम आईआईटी रुड़की और उत्तर प्रदेश सरकार के साथ सतत कृषि के लिए एक प्रौद्योगिकी-सक्षम कार्बन-क्रेडिट इकोसिस्टम विकसित करने में सहयोग करके प्रसन्न हैं। यह साझेदारी जलवायु कार्रवाई, वैज्ञानिक कठोरता और जमीनी स्तर पर कार्यान्वयन को जोड़ने के साथ-साथ किसानों के लिए अधिक मूल्य और भागीदारी सुनिश्चित करने का अवसर प्रदान करती है। जबकि मैसर्स त्र्यंभु टेक सॉल्यूशन्स के सीईओ प्रवीर मिश्रा ने कहा कि यह साझेदारी सतत कृषि पद्धतियों को समर्थन देने और उभरते कार्बन-क्रेडिट इकोसिस्टम में किसानों की भागीदारी को मजबूत करने के लिए प्रौद्योगिकी, वैज्ञानिक विशेषज्ञता और जमीनी स्तर के कार्यान्वयन को एक साथ लाने का अवसर प्रदान करती है।
आईआईटी के निदेशक प्रो. कमल किशोर पंत ने कहा कि आईआईटी वैज्ञानिक ज्ञान और तकनीकी नवाचार को ऐसे समाधानों में परिवर्तित करने के लिए प्रतिबद्ध है, जो सार्थक सामाजिक और पर्यावरणीय प्रभाव उत्पन्न करें। ये साझेदारियाँ सरकार, शिक्षा जगत और उद्योग को एक साथ लाकर एक विश्वसनीय और मजबूत कार्बन-क्रेडिट इकोसिस्टम विकसित करती हैं, जो सतत कृषि को बढ़ावा देने, जलवायु लचीलापन बढ़ाने और किसानों के लिए नए आर्थिक अवसर सृजित करने में सहायक हो सकता है।
उन्होंने कहा कि इस फ्रेमवर्क के अंतर्गत, आईआईटी रुड़की तकनीकी और वैज्ञानिक नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करेगा तथा वैज्ञानिक कार्यप्रणालियों, प्रोजेक्ट डिजाइन डॉक्यूमेंट्स की समीक्षा और निगरानी प्रणालियों आदि फ्रेमवर्क के पर्यवेक्षण, वैज्ञानिक मूल्यांकन, गुणवत्ता समीक्षा, क्षमता निर्माण, अनुसंधान और तकनीकी समन्वय में योगदान देगा।
कार्यक्रम में सैटेलाइट इंटीग्रेशन, जीआईएस मैपिंग, जीपीएस-सक्षम फील्ड सिस्टम, मोबाइल एप्लिकेशन, आईओटी, डिजिटल ऑडिट ट्रेल्स और ट्रांसपेरेंसी डैशबोर्ड्स के उपयोग की परिकल्पना की गई है, ताकि निगरानी, ट्रेसेबिलिटी और पारदर्शिता को मजबूत किया जा सके।
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