चेन्नई , जुलाई 10 -- आईआईटी-मद्रास ने शुक्रवार को परिसर में आयोजित 'राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संवर्धित शिक्षण कार्यक्रम' (एनपीटीईएल) स्टार्स' कार्यक्रम में दक्षिण भारत के 1,842 असाधारण शिक्षार्थियों को सम्मानित किया।
संस्थान ने एनपीटीईएल के माध्यम से जीवन भर सीखने के प्रति उनकी निरंतर प्रतिबद्धता को मान्यता दी। यह दुनिया की सबसे बड़े ओपन ऑनलाइन कोर्स (एमओओसी) की पहलों में से एक है।
एनपीटीईएल स्टार्स वे शिक्षार्थी हैं जो समय के साथ कई एनपीटीईएल पाठ्यक्रमों को सफलतापूर्वक पूरा करते हैं और प्रमाणपत्र प्राप्त करते हैं। इससे विभिन्न विषयों में लगातार शैक्षणिक उत्कृष्टता प्रदर्शित होती है। यह मान्यता न केवल निरंतर सीखने को दर्शाती है बल्कि छात्रों, कामकाजी पेशेवरों, शिक्षकों और शोधकर्ताओं के बीच लगातार कौशल सुधार की बढ़ती संस्कृति को भी दर्शाती है।
आईआईटी, भारतीय विज्ञान संस्थान बैंगलोर और अन्य प्रमुख संस्थानों की एक संयुक्त पहल के रूप में 23 वर्ष से अधिक समय पहले स्थापित, एनपीटीईएल ने देश भर के शिक्षार्थियों को न्यूनतम लागत पर आईआईटी-स्तर के पाठ्यक्रम उपलब्ध कराकर उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा तक पहुंच को लोकतांत्रिक बनाने में अग्रणी भूमिका निभायी है।
जनवरी-अप्रैल 2026 सेमेस्टर के दौरान देश भर में मान्यता प्राप्त 10,763 एनपीटीईएल स्टार्स में से दक्षिण क्षेत्र के 1,842 शिक्षार्थी थे। इनमें से 8,011 शिक्षार्थियों ने इस सेमेस्टर में पहली बार यह गौरव हासिल किया है।
समारोह के बाद 11 जुलाई 2026 को दक्षिण क्षेत्र के 550 से अधिक स्वयं-एनपीटीईएल स्थानीय चैप्टर समन्वयकों को सम्मानित किया गया। इसमें गुणवत्तापूर्ण ऑनलाइन शिक्षा तक पहुंच बढ़ाने में उनकी भूमिका को स्वीकार किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता आईआईटी मद्रास के डीन (अकादमिक पाठ्यक्रम) प्रो. प्रताप हरिदास ने की। इसमें आईआईटी मद्रास के सेंटर फॉर आउटरीच एंड डिजिटल एजुकेशन (सीओडीई) के अध्यक्ष प्रो. एंड्रयू थंगराज, कोड के सह-अध्यक्ष प्रो. विग्नेश मुथुविजयन, संकाय सदस्य, छात्र और शिक्षार्थी उपस्थित थे।
प्रो. प्रताप हरिदास ने कहा, "एनपीटीईएल की वास्तविक सफलता केवल लाखों नामांकनों से नहीं, बल्कि इससे बदले हुए जीवनों से मापी जाती है। अपनी शुरुआत से ही, एनपीटीईएल ने सभी के लिए आईआईटी-गुणवत्ता वाली शिक्षा सुलभ बनाने का प्रयास किया है और आज यह दुनिया की सबसे बड़ी मूक (एमओओसी) पहलों में शामिल है। उन्होंने बताया कि जनवरी-अप्रैल 2026 का सेमेस्टर एनपीटीईएल पारिस्थितिकी तंत्र (इकोसिस्टम) के लिए एक और मील का पत्थर रहा। एनपीटीईएल-स्वयं प्लेटफॉर्म के माध्यम से इंजीनियरिंग, विज्ञान, प्रबंधन, मानविकी और विभिन्न विषयों से जुड़े कुल 973 ऑनलाइन पाठ्यक्रम पेश किये गये। इन पाठ्यक्रमों में 36.8 लाख नामांकन किये गये, जबकि देश भर के 200 से अधिक शहरों में आयोजित की गयी परीक्षाओं में 12.6 लाख शिक्षार्थियों ने पंजीकरण कराया और वे परीक्षा में शामिल हुए।
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