चेन्नई , अगस्त 14 -- भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मद्रास के प्रोफेसर थलप्पिल प्रदीप को स्वीडन के गोथेनबर्ग स्थित 'यूरोपियन एकेडमी ऑफ इंजीनियरिंग' का पूर्ण सदस्य चुना गया है।
प्रोफेसर प्रदीप को यह सम्मान जल शोधन और नैनो-प्रौद्योगिकी क्षेत्र में उनके क्रांतिकारी योगदान और इसके सामाजिक प्रभाव के लिए दिया गया है। उनके शोध और नवाचारों की मदद से देश में लाखों लोगों को आर्सेनिक और कीटनाशकों जैसे हानिकारक तत्वों से मुक्त सुरक्षित पेयजल उपलब्ध हो सका है।
वह इस प्रतिष्ठित अकादमी के सदस्य बनने वाले तीसरे भारतीय वैज्ञानिक बन गए हैं। इस अकादमी में कई नोबेल पुरस्कार विजेता, फील्ड्स मेडलिस्ट और ट्यूरिंग अवॉर्ड विजेता सदस्य के रूप में शामिल हैं। उनसे पहले प्रसिद्ध वैज्ञानिक प्रोफेसर सी.एन.आर. राव और भारतीय विज्ञान संस्थान बेंगलुरु के प्रोफेसर बिमान बागची ही ऐसे दो अन्य भारतीय वैज्ञानिक हैं, जिन्हें इससे पहले अकादमी का सदस्य चुना गया है। हालांकि, यूरोप और अमेरिका में काम करने वाले भारतीय मूल के कई अन्य वैज्ञानिक भी इस अकादमी के सदस्य हैं। यह अकादमी दुनिया भर के प्रमुख वैज्ञानिक और इंजीनियरिंग विशेषज्ञों को एक साथ लाती है ताकि प्रमुख वैश्विक, क्षेत्रीय और राष्ट्रीय चुनौतियों पर स्वतंत्र विशेषज्ञता प्रदान की जा सके।
प्रोफेसर थलप्पिल प्रदीप को नैनो-मटीरियल्स, मॉलिक्यूलर सिस्टम्स और किफायती तकनीकों के विकास के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जाना जाता है। उन्होंने नैनो-साइंस के मूलभूत आविष्कारों को ऐसी बड़े पैमाने पर लागू होने वाली तकनीकों से जोड़ा है, जो दुनिया की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता का समाधान करती हैं।
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