नयी दिल्ली , मई 21 -- विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के प्रौद्योगिकी अभिव्यक्ति अनुसंधान पार्क - टेक्समाइन फाउंडेशन, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, धनबाद तथा रूस की संयुक्त उद्यम कंपनी ग्रिडमेट ने दुर्लभ पृथ्वी स्थायी चुंबक प्रौद्योगिकियों, महत्वपूर्ण खनिजों और उन्नत धातुकर्म अनुसंधान में द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करने के लिए एक "आशय-पत्र" पर हस्ताक्षर किए हैं।

गुरुवार को यहां जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार यह समझौता रूस के मॉस्को में दुर्लभ खनिज उद्योग के सम्मेलन रेयरमेट-2026 के दौरान किया गया। यह समझौता टेक्समाइन और ग्रिडमेट के बीच इसी वर्ष छह फरवरी हुए समझौता ज्ञापन के बाद अगला महत्वपूर्ण रणनीतिक कदम माना जा रहा है। पहला समझौता आईआईटी (आईएसएम) धनबाद में उद्योग एवं संस्थान संवाद-2026 प्रदर्शनी के दौरान हुआ था।

महत्वपूर्ण खनिज प्रौद्योगिकियों, दुर्लभ खनिजों की मूल्य श्रृंखलाओं और उन्नत सामग्री अनुसंधान के क्षेत्र में भारत-रूस साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण पहल बतायी गयी है। यह दोनों देशों की दीर्घकालिक औद्योगिक और रणनीतिक प्राथमिकताओं के अनुरूप माना जा रहा है।

रेयरमेट-2026 का आयोजन ग्रिडमेट द्वारा रोस्टोम के अंतर्गत किया जा रहा है जो रूस के सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय मंचों में से एक माना जाता है। यह मंच दुर्लभ धातुओं और खनिजों, उन्नत प्रौद्योगिकियों और सतत औद्योगिक विकास पर केंद्रित है।

टेक्समाइन के परियोजना निदेशक और आईआईटी धनबाद के उप निदेशक धीरज कुमार ने इस समझौते को दुर्लभ पृथ्वी चुंबकों और महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में भारतीय विशेषज्ञता विकसित करने की दिशा में एक रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण कदम बताया।

आईआईटी (आईएसएम) धनबाद के निदेशक और टेक्समाइन फाउंडेशन के केंद्र संचानल मंडल के चेयरमैन सुकुमार मिश्रा ने कहा, "स्वच्छ ऊर्जा, उन्नत विनिर्माण और रणनीतिक प्रौद्योगिकियों की ओर वैश्विक बदलाव ने महत्वपूर्ण खनिजों और दुर्लभ पृथ्वी सामग्रियों के महत्व को काफी बढ़ा दिया है।

उन्होंने कहा कि टेक्समाइन और ग्रिडमेट के बीच यह सहयोग तकनीकी क्षमताओं, नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र और मजबूत आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुदृढ़ करने में अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक साझेदारियों की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है। हमें विश्वास है कि इस प्रकार की साझेदारियाँ रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता और सतत औद्योगिक विकास की दीर्घकालिक दृष्टि को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान देंगी।

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