बेंगलुरु , अगस्त 01 -- भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) बेंगलुरु ने शनिवार को अपनी पहली स्नातक अध्ययन इकाई और इंडोनेशिया में एक अंतरराष्ट्रीय परिसर स्थापित करने की घोषणा की। संस्थान ने इसे उच्च प्रबंधन शिक्षा से आगे बढ़कर वैश्विक और बहुआयामी शिक्षण संस्थान बनने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

आईआईएमबीएए लीडरशिप कॉन्क्लेव-2026 को संबोधित करते हुए संस्थान के कार्यवाहक निदेशक प्रो. दिनेश कुमार ने कहा कि टाटा ट्रस्ट्स के सहयोग से स्थापित गोरूर रतन टाटा स्कूल ऑफ अंडरग्रेजुएट स्टडीज के माध्यम से पहली बार 17 वर्ष आयु वर्ग के विद्यार्थियों को प्रवेश दिया जाएगा।

उन्होंने कहा, "हमने अब तक 20 वर्ष के विद्यार्थियों के साथ काम किया है। 17 वर्ष के विद्यार्थियों के साथ यह हमारा पहला अनुभव होगा।"प्रो. कुमार ने कहा कि हमारा उद्देश्य केवल एक नया स्नातक पाठ्यक्रम शुरू करना नहीं, बल्कि प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय की विरासत से प्रेरित विश्वस्तरीय शिक्षण संस्थान का निर्माण करना है। उन्होंने कहा कि भारत पहले भी ज्ञान का वैश्विक केंद्र रहा है और भविष्य में भी ऐसी भूमिका निभा सकता है।

उन्होंने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इंडोनेशिया यात्रा के दौरान घोषित योजना के तहत आईआईएम बेंगलुरु इंडोनेशिया में अपना नया परिसर स्थापित करेगा। उनके अनुसार यह परिसर एशिया में उच्च शिक्षा की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के साथ संस्थान की वैश्विक उपस्थिति को और मजबूत करेगा।

प्रो. कुमार ने कहा कि राष्ट्र निर्माण संस्थान का प्रमुख उद्देश्य है और उच्च शिक्षण संस्थानों की जिम्मेदारी ऐसे नेतृत्व का विकास करना है जो भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में योगदान दे सके।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का उल्लेख करते हुए उन्होंने मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) के एक अध्ययन का हवाला देते हुए कहा कि लगभग 95 प्रतिशत एआई परियोजनाएं तकनीक की अपर्याप्त समझ के कारण विफल हो जाती हैं। उन्होंने कहा कि डेटा, मशीन लर्निंग और प्रभावी नेतृत्व-तीनों का संतुलित उपयोग ही एआई से सार्थक परिणाम दिला सकता है।

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