विजयवाड़ा , अक्टूबर 10 -- आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू की अध्यक्षता में आंध्र प्रदेश कैबिनेट ने आने वाले स्थानीय निकाय चुनावों में पिछड़े वर्गों को आरक्षण देने का फ़ैसला किया है।
कृषि मंत्री के. अच्चन्नायडू ने कैबिनेट के फ़ैसलों के बारे में संवाददाताओं को जानकारी देते हुए बताया कि पिछड़े वर्गों के आरक्षण के संबंध में उच्चतम न्यायालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार एक विशेष आयोग बनाया गया था। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ आईएएस अधिकारी राजीव रंजन मिश्रा की अगुवाई वाले आयोग ने स्थानीय निकाय चुनाव में आबादी के आधार पर पिछड़े वर्गों (बीसी) के लिए आरक्षण पर एक रिपोर्ट सौंपी। मंत्री ने बताया, "कैबिनेट ने आयोग की सिफारिशों की समीक्षा करने के बाद उन्हें मंज़ूरी दे दी है और आगे की कार्रवाई के लिए मामले को चुनाव आयोग के पास भेज दिया है।"मंत्री ने बताया कि आयोग की सिफारिशों के अनुसार स्थानीय निकाय की प्रकृति के आधार पर अलग-अलग इकाईयों के लिए पिछड़े वर्गों का आरक्षण तय किया गया है। मंत्री ने घोषणा की, "पिछड़े वर्गो के लिए प्रस्तावित आरक्षण इस प्रकार हैं- ग्राम पंचायत वार्ड सदस्यों के लिए 26.73 प्रतिशत, ग्राम पंचायत सरपंचों के लिए 27.95 प्रतिशत, एमपीटीसी सदस्यों के लिए 25.55 प्रतिशत, एमपीपी अध्यक्षों के लिए 24.60 प्रतिशत, जेडपीटीसी सदस्यों के लिए 24.60 प्रतिशत, ज़िला परिषद अध्यक्षों के लिए 23.08 प्रतिशत, शहरी स्थानीय निकाय वार्ड सदस्यों के लिए 32.78 प्रतिशत, नगरपालिका अध्यक्षों के लिए 33.02 प्रतिशत और महापौरों के लिए 35.29 प्रतिशत।"मंत्री ने ज़ोर देकर कहा, "सभी स्थानीय निकाय को मिलाकर पिछड़े वर्गों को औसतन 28.18 प्रतिशत आरक्षण मिलता है। कुछ इकाईयों में हालांकि प्रतिशत कम लग सकता है लेकिन आरक्षण स्थानीय आबादी के आंकड़े, आयोग की सिफारिशों और कानूनी सीमाओं के आधार पर तय किया गया है।" मंत्री अच्चन्नायडू ने साफ़ किया कि राजग गठबंधन की पार्टियों ने उन इलाकों में, जहां अभी आरक्षण 34 प्रतिशत से कम है, स्थानीय निकाय चुनावों में पिछड़े वर्गों को 'पार्टी स्तर पर 34 प्रतिशत से अधिक' मौके देने का फ़ैसला किया है।
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