विजयवाड़ा , अगस्त 04 -- वाईएसआरसीपी के एनटीआर जिले के डॉक्टर प्रकोष्ठ के अध्यक्ष डॉ. अंबाती नागा राधाकृष्ण यादव ने 'युवा डॉक्टरों के बड़े पैमाने पर हो रहे शोषण' की कड़ी निंदा की है। उन्होंने राष्ट्रीय कार्य बल विनियमन का घोर उल्लंघन कर गैर-कानूनी और अमानवीय ड्यूटी व्यवस्था' चलाने के लिए निजी मेडिकल कॉलेजों पर जोरदार निशाना साधा है।
यह बयान राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) के उच्चतम न्यायालय के समक्ष दायर एक ऐतिहासिक हलफनामे में खुद स्वीकार करने के बाद आया है, जिसमें कहा गया है कि लगातार 24-घंटे की ड्यूटी ही पीजी डॉक्टरों में गंभीर मानसिक तनाव, मानसिक आघात और शारीरिक थकावट का मुख्य कारण है।
डॉ. यादव ने मंगलवार को यहां जारी बयान में कहा कि वाईएसआरसीपी डॉक्टर प्रकोष्ठ ने राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग के समक्ष जीवन के लिए खतरनाक बनी इन परिस्थितियों का मुद्दा बार-बार उठाया था। शोषणकारी ड्यूटी रोस्टर के बारे में पूरी जानकारी होने के बावजूद जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग मूकदर्शक और मौन भागीदार बने रहे, जिससे निजी प्रबंधन को खुलेआम कानूनों की धज्जियां उड़ाने की छूट मिल गयी। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस सरकार और अधिकारियों की चुप्पी कॉर्पोरेट कॉलेजों के लिए पीजी डॉक्टरों से बंधुआ मजदूरी कराने का लाइसेंस बन गयी है और यह लापरवाही नहीं, बल्कि मिलीभगत है।
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