अंबेडकरनगर , मार्च 18 -- अहमदाबाद आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस) ने अंबेडकरनगर के महरुआ इलाके के रामनगर कर्री गांव में छापेमारी कर अहमदाबाद में दर्ज एक मादक पदार्थों के मामले में वांछित दो अंतर-राज्यीय ड्रग तस्करों को गिरफ्तार किया है।

अधिकारियों ने बुधवार को बताया कि कल देर रात चलाए गए एक अभियान में एक पोल्ट्री फार्म पर छापा मारा गया। यहां कथित तौर पर आरोपी छिपे हुए थे और पोल्ट्री के काम की आड़ में मादक पदार्थों का अवैध व्यापार चला रहे थे।

संदिग्धों की पहचान अयोध्या के तरुण इलाके के निवासियों के रूप में हुई है। ये लोग इस साल की शुरुआत में अहमदाबाद में दर्ज एक मादक पदार्थ मामले के सिलसिले में वांछित थे।

रिपोर्टों के अनुसार, एटीएस टीम ने मौके से कई ड्रम और सफेद पाउडर बरामद किया है, जिसका कथित तौर पर नशीले पदार्थों से संबंध है। स्थानीय पुलिस अधिकारियों ने ऐसी किसी भी बरामदगी से इनकार किया है।

यह मामला जनवरी का है, जब अहमदाबाद पुलिस ने कई लोगों को गिरफ्तार किया था और करोड़ों रुपये के नशीले पदार्थ जब्त किए थे। पूछताछ के दौरान, गिरफ्तार आरोपियों ने दो संदिग्धों को इस नेटवर्क का मास्टरमाइंड बताया था, जिनकी पहचान रामाशंकर उर्फ पंकज और कपिलदेव के रूप में हुई है।

इसके बाद, एटीएस टीमों ने गुजरात, महाराष्ट्र, दिल्ली और लखनऊ सहित कई जगहों पर छापे मारे लेकिन आरोपी फरार रहे। पुलिस के अनुसार, उन्होंने अपने मोबाइल फोन बंद कर दिए थे और करीब दो महीने पहले पास के रामनगर कर्री में एक बंद पड़े पोल्ट्री फार्म को किराए पर लेने से पहले, जैतुपुर गांव में एक रिश्तेदार के घर पनाह ली थी।

संदिग्धों ने जब देखा की स्थिति सामान्य हो गयी है तो उन्होंने अपने फोन फिर से चालू कर लिए था। अधिकारियों को निगरानी के ज़रिए उनकी लोकेशन का पता लगया लिया था।

प्राप्त जानकारी पर कार्रवाई करते हुए, पुलिस निरीक्षक पीयूष के नेतृत्व में एटीएस टीम तड़के करीब दो बजे महरुआ पहुंची और स्थानीय पुलिस की मदद से अभियान को अंजाम देते हुए दोनों तस्करों को गिरफ्तार कर लिया। पोल्ट्री फार्म की गहन तलाशी के बाद, एटीएस टीम आरोपियों को लेकर अहमदाबाद के लिए रवाना हो गयी।

स्थानीय सूत्रों ने बताया कि पारिवारिक संबंधों के कारण संदिग्धों के जैतुपुर से पुराने संबंध थे और वे बचपन से ही अक्सर इस इलाके में आते-जाते रहते थे।

अपने प्रवास के दौरान, बताया जाता है कि वे दिन में नाई के तौर पर काम करते थे, जबकि रात में मादक पदार्थों की तस्करी का धंधा चलाते थे। उन्होंने इस इलाके में ज़मीन-जायदाद में भी काफी निवेश किया था, जिससे ग्रामीणों को उनकी गतिविधियों पर शक होने लगा था।

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