चंडीगढ़ , जुलाई 15 -- पंजाब भारतीय जनता पार्टी अनुसूचित जाति मोर्चा के उपाध्यक्ष परमजीत सिंह कैंथ ने फरीदकोट स्थित गुरु गोबिंद सिंह मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में लावारिस मृतक के शव को श्मशान घाट के बाहर फेंके जाने की घटना को बेहद शर्मनाक, अमानवीय और निंदनीय बताया है।
उन्होंने कहा कि यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि पंजाब की स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाल स्थिति का गंभीर उदाहरण है। श्री कैंथ ने बुधवार को कहा कि भगवंत मान सरकार जिस 'स्वास्थ्य क्रांति' का दावा करती रही है, फरीदकोट की घटना ने उसकी वास्तविकता उजागर कर दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों और स्टाफ की कमी, दवाओं का अभाव तथा मरीजों को हो रही परेशानियां यह साबित करती हैं कि पंजाब की स्वास्थ्य व्यवस्था को वास्तविक सुधारों की जरूरत है, न कि केवल प्रचार की। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को मृत्यु के बाद भी सम्मानजनक व्यवहार मिलना चाहिए। ऐसे मामलों में सरकार और संबंधित संस्थानों की नैतिक एवं कानूनी जिम्मेदारी बनती है कि मृतकों के साथ गरिमापूर्ण व्यवहार सुनिश्चित किया जाये। यह घटना केवल एक अस्पताल की विफलता नहीं, बल्कि पूरे स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
उन्होंने कहा कि केवल निचले स्तर के कर्मचारियों को निलंबित कर देना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने मांग की कि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. बलबीर सिंह इस घटना की नैतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी स्वीकार करें।
भाजपा नेता ने मांग की कि मामले की उच्च स्तरीय, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच करायी जाये, सभी जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाये तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी और विभागीय कार्रवाई की जाये। साथ ही राज्य के सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में मरीजों और मृतकों के सम्मानजनक व्यवहार से संबंधित निर्धारित प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाये।
श्री कैंथ ने कहा कि पंजाब की जनता अब केवल दावों और प्रचार से संतुष्ट नहीं होगी, बल्कि उसे जवाबदेह, संवेदनशील और भरोसेमंद स्वास्थ्य व्यवस्था चाहिए। उन्होंने सरकार से स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने, मानव गरिमा की रक्षा करने और प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने की अपील की।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित